तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों को लोकसभा के स्पीकर ने नोटिस जारी कर दिया है। लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के इस नोटिस का जवाब 7 दिन में देना होगा। एक दिन पहले ही TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी इन सांसदों को नोटिस जारी किया था। अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि स्पीकर ओम बिरला के सामने लंबित अयोग्यता संबंधी याचिकों पर जल्द से जल्द फैसला हो। रोचक बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा के स्पीकर को कोई नोटिस नहीं जारी किया था लेकिन अब ओम बिरला ने ही इन सांसदों को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया है।
TMC ने लोकसभा के स्पीकर को अर्जी दी थी कि इन सांसदों की सदस्यता समाप्त कर दी जाए। इसके पीछे TMC का तर्क है कि इन सांसदों ने पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है और इन पर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। नियम कहते हैं कि अगर कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाता है तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। हालांकि, NCPI में गए सांसदों का तर्क है कि दो तिहाई सांसद एकसाथ गए हैं इसलिए यह कानून उन पर लागू नहीं होगा।
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बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में लोकसभा स्पीकर की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि बागी सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह स्पीकर को भी नोटिस जारी कर सकता है लेकिन तुषार मेहता के अनुरोध पर ही ऐसा नहीं किया गया। अभिषेक बनर्जी की इस याचिका पर CJI सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने नोटिस जारी किया था।
आगे क्या हो सकता है?
इस मामले में स्पीकर के फैसले पर ही सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने हिसाब से दलीलें दे रहे हैं। अभिषेक बनर्जी का कहना है कि यह 10वीं अनुसूची का उल्लंघन है। वहीं, बागी सांसदों का कहना है कि दो तिहाई सांसदों के कारण उन पर यह लागू ही नहीं होता है। बता दें कि इसी तरह शिवसेना के बागी सांसदों के अलग गुट को मान्यता दी थी।
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इस मामले में एक अलग पेच है कि इन सांसदों ने अलग गुट नहीं बनाया है। ये सांसद अलग दल में ही शामिल हो गए हैं। हालांकि, कुछ दिनों पहले इसी तरह आम आदमी पार्टी के 7 सांसद भी बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिका पर भी अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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कब, क्या हुआ?
14 जून: TMC के 20 सांसद NCPI में शामिल हो गए और NDA का समर्थन किया।
15 जून: ये सांसद लोकसभा के स्पीकर से मिले और उन्हें इसकी जानकारी देने वाला एक पत्र सौंपा।
19 जून: अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा के स्पीकर से मुलाकात की और मांग उठाई कि इन 20 सांसदों को अयोग्य ठहराया जाए।
27 जुलाई: अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को एक टिट्ठी लिखकर जल्द फैसला लेने की मांग की।
12 अगस्त: फैसले में देरी के चलते अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर ओम बिरला को फिर से चिट्ठी लिखी।
25 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने 20 सांसदों को नोटिस भेजा।
26 अगस्त: लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने 20 बागी सांसदों को नोटिस भेजा।