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पेट्रोल पंप और गैस के लिए लंबी लाइनें, देशभर में अफरा-तफरी; अब मिलेगा कैरोसिन?

देश में गैस संकट के बीच सरकार ने कहा है कि औसत महीने की कमर्शियल एलपीजी जरूरत का 20% कमर्शियल इस्तेमाल के लिए दिया जाएगा।

Gas crisis

देश में गैस की किल्लत। Photo Credit- PTI

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में एलपीजी गैर की किल्लत जारी है। अफरातफरी के बीच लोग लाइनों में खड़े होकर घंटों गैर सिलेंडर लेने की अपनी बारी की इंतजार करने देखे गए। इन चिंताओं के बीच देश में एलपीजी गैस की सप्लाई पर बढ़ती चिंताओं के बीच सरकार हालात सामान्य करने के प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार रेस्टोरेंट और होटल जैसे कमर्शियल यूजर्स के लिए एलपीजी गैस पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन, फ्यूल ऑयल, बायोमास और कोयले जैसे दूसरे विकल्पों की ओर ध्यान दिया है।

 

सरकार ने यह भी तय किया है कि औसत महीने की कमर्शियल एलपीजी जरूरत का 20% कमर्शियल इस्तेमाल के लिए दिया जाएगा। यह राज्य सरकारों के साथ समन्वय से किया जाएगा। इसके अलावा, घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा गैस की पैनिक बुकिंग के बीच मांग को देखे हुए उपाय के तौर पर, ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में घरों द्वारा सिलेंडर बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। 

 

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पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें 

वहीं शहरी घरों के लिए यह 25 दिन ही रहेगा। पहले न्यूनतम अंतर 21 दिन का था, लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। देश में ईंधन की कमी की खबरों के बीच गुरुवार को देशभर में लोग पेट्रोल पंपों और एलपीजी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए, जिससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ रेस्तरां, स्कूलों और खानपान सेवाओं का कामकाज भी प्रभावित होने लगा है। हालांकि सरकार ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की कोई कमी नहीं है और यह अफवाहें फैलाने का समय नहीं है।

 

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कई राज्यों में हो रहे बदलाव

उत्तराखंड सरकार ने अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का निर्णय किया है और जरूरत पड़ने पर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की तैयारी भी शुरू कर दी है। काफी हद तक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर होटलों और रेस्तरां मालिकों में डर है कि आपूर्ति में पाबंदियां लगने से उनका कामकाज बाधित हो सकता है और लागत बढ़ सकती है।

 

देश के कई हिस्सों में कुछ होटलों को अपना कामकाज सीमित करना पड़ा है। तमिलनाडु होटल्स एसोसिएशन के अनुसार राज्य में छोटे और मध्यम रेस्तरां बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। चेन्नई के कई प्रतिष्ठित होटलों को घटते गैस भंडार को बचाने के लिए डोसा और फ्राइड राइस जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन परोसना बंद करना पड़ा है। 


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