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NCP के दोनों धड़े फ्लॉप, महायुति में वापसी या अलग-थलग पड़ेंगे अजीत और शरद पवार?

पिंपरी चिंचवड में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों का प्रदर्शन शून्य रहा। चाचा शरद पवार और भतीजे अजीत पवार, अपने मतभेद भुलाकर साथ आए थे लेकिन कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई।

Ajit Pawar

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के चीफ अजीत पवार। Photo Credit: PTI

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महाराष्ट्र में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी, सबसे बड़ी सियासी पार्टी बनकर उभरी है। राज्य के 29 नगर निगमों में हुए चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, दूसरे नंबर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड की महानगरपालिका चुनावों में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की है। बीजेपी ने पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PMC) की 165 सीटों में से लगभग 110-120 सीटों पर बढ़त बनाई है और पिंपरी-चिंचवड म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PCMC) की 128 सीटों में से करीब 80-85 सीटों पर लीड ली है। महायुति से अलग होकर चुनाव लड़ रहे अजीत पवार के लिए यह तगड़ा झटका है।

यह बीजेपी की लगातार दूसरी जीत है। दोनों जगहों पर बीजेपी ने दूसरी बार बढ़त हासिल की है। इस चुनाव में अजीत पवार की एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने पहली बार साथ आकर बीजेपी को टक्कर देने की कोशिश की थी। 2023 में पार्टी से अलग होने के बाद दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड में मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन वोटरों ने उनका साथ नहीं दिया। दोनों एनसीपी गुटों को बहुत कम सीटें मिलीं और वे बीजेपी के सामने पूरी तरह कमजोर साबित हुए।

 

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बीजेपी पर हमला बोला, वापसी कैसे करेंगे अजीत पवार?

अजीत पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम हैं। महायुति के दूसरे सबसे मजबूत साथी भी हैं। इस चुनाव में उन्होंने बीजेपी पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और अपने चाचा शरद पवार के साथ गठबंधन किया। वोटरों ने उनकी इस रणनीति को नकार दिया। नतीजे से अजीत पवार की साख को बड़ा झटका लगा है। अब उन्हें महायुति सरकार में बीजेपी के साथ तालमेल में दिक्कत आ सकती है।
Ajit Pawar

बीजेपी ने क्या रणनीति अपनाई?

बीजेपी ने इन चुनावों में पुरानी रणनीति को जारी रखा। पार्टी ने कई विपक्षी दलों से मजबूत उम्मीदवारों को अपने साथ जोड़ा, जैसे एनसीपी और कांग्रेस के कुछ प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को टिकट दिए। बीजेपी ने नए चेहरों को मौका दिया और विधायकों के रिश्तेदारों तक को टिकट नहीं दिया। इससे पार्टी में कोई बड़ा बगावत नहीं हुई। नगर निगम चुनाव में कार्यकर्ताओं ने अहम भूमिका निभाई। 

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बीजेपी ने पवार के गढ़ में सेंध कैसे लगा ली?

पिछले कुछ चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन इस इलाके में लगातार बेहतर होता गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में थोड़ा झटका लगा था, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी ने वापसी की। अब इन नगर निगम चुनावों में बीजेपी ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। विकास के कामों और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने वोटरों को आकर्षित किया।

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अब अजीत पवार के सामने क्या चुनौती है?

एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के लिए भविष्य अब काफी चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। दोनों गुटों का यह गठबंधन फेल हो गया है। अजीत पवार को अब फैसला करना होगा कि वे बीजेपी के साथ बने रहें या फिर चाचा के साथ पूरी तरह जुड़ जाएं। बीजेपी की बढ़ती ताकत के आगे दोनों गुटों के विकल्प बहुत कम रह गए हैं। नगर निगम चुनावों के ये नतीजे महाराष्ट्र में बीजेपी की मजबूत स्थिति को दिखा रहे हैं।

किसी जमाने में शिवसेना के साथ सरकार चलाने को मजबूर बीजेपी, अब महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी है। देवेंद्र फडणवीस, बड़े नेता बनकर उभरे हैं। पवार और ठाकरे परिवार की सियासत कमजोर पड़ने लगी है। दोनों परिवारों के सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब आने वाले जिला परिषद चुनावों में भी इस जीत का असर नजर आ सकता है। 


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