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'नाम भी लेंगे, निशान भी...', TMC पर EC के फैसले के खिलाफ SC पहुंची ममता बनर्जी

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और निशान, उपचुनाव तक फ्रीज कर दिया है। टीएमसी कई धड़ों में बंट गई है।

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ममता बनर्जी, File Photo Credit: Social Media

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ममता बनर्जी , तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग के रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का मूल नाम और फूल-घास वाला चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। ममता के गुट को अब यह नाम और चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है।

तृणमूल कांग्रेस पार्टी के अंदर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न दे दिए हैं। अरूप रॉय वाले गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चिह्न मिला है। ममता बनर्जी वाले गुट को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न दिया गया है। 

यह भी पढ़ें: 'लिफाफे में भरकर क्या आया?', TMC के बहाने चुनाव आयोग को क्यों घेर रही CJP?

चुनाव आयोग के फैसले से नाराज ममता बनर्जी

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा का राजनीतिक दल माना है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी का असली नाम और चिह्न खो जाना वैसा ही है जैसे मां अपना बच्चा खो दे। 

सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि यह अंतरिम व्यवस्था उन्हें मंजूर नहीं है और वे कानूनी, राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से मूल पहचान वापस लेने की लड़ाई जारी रखेंगी। यही वजह है कि चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं।

यह भी पढ़ें: 6 महीने में ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी का नाम और निशान तक कैसे चला गया? समझिए

नंदीग्राम कांड से भी नाराज हैं ममता बनर्जी 

ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। उनका गुट कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। ममता बनर्जी के गुट ने इसे अलोकतांत्रिक फैसला बताया था।


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