क्या आपने कभी सोचा है कि अपने मोबाइल फोन पर अपनी मातृभाषा में कुछ वाक्य बोलने से आपको शहर की किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा कमाई हो सकती है? यह अब AI मॉडल के जरिए पूरा होने जा रहा है। अब तक माना जाता था कि AI नौकरियां छीन लेगा लेकिन अब यह स्टार्टअप कार्या (Karya) के जरिए गांव के लोगों के लिए कमाई का जरिया बन रहा है। यह कंपनी अपने लिए काम करने वाले लोगों को हर घंटे के लिए 450 रुपये दे रही है। इस हिसाब से अगर कोई हर दिन 8 घंटे काम करता है तो महीने में कम से कम एक लाख रुपये कमा सकता है।
मनु चोपड़ा ने 2021 में कार्या की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि एआई केवल अंग्रेजी तक सीमित न रहे, बल्कि भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों को भी समझ सके। उनका मानना है कि जब तक तकनीक स्थानीय भाषाओं में सक्षम नहीं होगी तब तक बड़ी आबादी इससे पूरी तरह लाभ नहीं उठा पाएगी। इस स्टार्टअप के को फाउंडर मनु चोपड़ा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं।
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गांव वालों को कैसे मिल रहा काम?
कार्या ग्रामीण और कम आय वाले लोगों को उनकी अपनी भाषा में छोटे-छोटे वाक्य पढ़कर रिकॉर्ड करने का काम देता है। इसके बदले कंपनी करीब 5 डॉलर यानी लगभग 450 रुपये प्रति घंटा तक भुगतान करती है। जो कई जगहों के न्यूनतम मजदूरी से काफी ज्यादा है। इन रिकॉर्डिंग से अलग-अलग भाषाओं और उच्चारण का डेटा तैयार होता है, जिससे AI सिस्टम भारतीय भाषाओं को बेहतर समझ पाते हैं।
अगले स्टेप में लोगों को इमेज दिखाना और उनसे अपनी भाषा में उनके बारे में बताने के लिए कहना शामिल है। इससे AI को नैचुरल स्पीच सीखने में मदद मिलती है। सबटाइटलिंग या भाषा सुधार जैसे एडवांस्ड कामों के लिए हर घंटे लगभग 10 डॉलर मिल सकते हैं, जबकि ज्यादा मुश्किल और टेक्निकल कामों के लिए हर घंटे 25 डॉलर तक मिल सकते हैं।
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कार्या से लोगों की जिंदगी में बदलाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओडिशा की कारीगर स्वर्णलता नायक जैसी कई महिलाओं की इनकम इस प्रोजेक्ट से बढ़ी है। पहले वह मुश्किल से 1,000 रुपये महीने कमाती थीं लेकिन कार्या से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर अपनी भाषा में आवाजें रिकॉर्ड करके सिर्फ एक हफ्ते में लगभग 4,000 रुपये कमाए।
कौन हैं मनु चोपड़ा?
मनु चोपड़ा ने 2015 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम करना शुरू किया। जहां उनका फोकस सोशल इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स पर था। 2016 में वह माइक्रोसॉफ्ट में रिसर्च इंटर्न बन गए, जहां उन्होंने हेल्थकेयर और सस्ती टेक्नोलॉजी से जुड़े सॉल्यूशन पर काम किया। 2018 में मनु माइक्रोसॉफ्ट में फिर से शामिल हो गए और ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया जिनसे पिछड़े समुदायों के लिए अच्छे रोजगार के मौके बने। बाद में उन्होंने कार्या (Karya) की सह-स्थापना की।