मशहूर संत रामकृष्ण परमहंस की जन्म जयंती पर गुरुवार को प्रधानमंत्री ने एक X पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने परमहंस को 'स्वामी परमहंस' लिखा था। अब इसी को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी भड़क गई हैं। ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें नए-नए सफिक्स और प्रीफिक्स नहीं निकालने चाहिए। ममता बनर्जी ने यह भी लिखा है कि रामकृष्ण संप्रदाय का में 'स्वामी' शब्द का इस्तेमाल शिष्यों के लिए किया जाता है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाए हैं कि प्रधानमंत्री ने राज्य की महान हस्तियों के प्रति सांस्कृतिक असंवेदनशीलता दिखाई है। पीएम मोदी के X पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए ममता बनर्जी ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ‘स्वामी’ संबोधन का इस्तेमाल किया है जबकि उन्हें व्यापक रूप से ‘ठाकुर’ उपनाम से संबोधित किया जाता है।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
CM ममता बनर्जी ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर लिखा, ‘फिर से स्तब्ध हूं! एक बार फिर हमारे प्रधानमंत्री ने बंगाल की महान हस्तियों के प्रति अपनी सांस्कृतिक असंवेदनशीलता को आक्रामक ढंग से पेश किया है। आज युगावतार रामकृष्ण परमहंसदेव की जन्मतिथि है। इस अवसर पर महान संत का सम्मान करने की कोशिश में हमारे प्रधानमंत्री ने उनके नाम के साथ एक अप्रत्याशित और अनुचित शब्द ‘स्वामी’ जोड़ दिया।’ इससे पहले पीएम मोदी श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके महान विचार सदा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
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PM मोदी ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में लिखा था, ‘स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी को उनकी जन्म-जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने अध्यात्म और साधना को जिस प्रकार जीवनशक्ति के रूप में स्थापित किया, वह हर युग में मानवता का कल्याण करता रहेगा। उनके सुविचार और संदेश सदैव प्रेरणापुंज बने रहेंगे।’ बता दें कि रामकृष्ण परमहंस का जन्म 1836 में हुआ था। श्री रामकृष्ण परमहंस ने कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा की। वह सर्वधर्म समन्वय एवं उनके सामंजस्य पर अपने उपदेशों के लिए जाने जाते हैं।
पीएम मोदी को आड़े हाथ लेते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘रामकृष्ण को श्रद्धा से ठाकुर (ईश्वर के समान) कहा जाता था। उनके निधन के बाद उनके संन्यासी शिष्यों ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और भारतीय परंपरा के अनुसार उन संन्यासियों को ‘स्वामी’ कहा गया लेकिन उन्हें ठाकुर के रूप में ही संबोधित किया जाता रहा।’ ममता बनर्जी ने कहा कि ‘स्वामी’ शब्द रामकृष्ण परमहंस के शिष्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि उनके लिए। उन्होंने कहा, ‘रामकृष्ण संप्रदाय में ‘स्वामी’ शब्द उनके शिष्यों के लिए होता है लेकिन संप्रदाय की पवित्र त्रिमूर्ति ठाकुर-मां-स्वामीजी हैं। यहां ‘ठाकुर’ श्री श्री रामकृष्ण परमहंसदेव हैं, ‘मां’ मां शारदा हैं और ‘स्वामीजी’ स्वामी विवेकानंद हैं।’
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ममता बनर्जी ने पीएम मोदी से अपील की है कि वह बंगाल की महान विभूतियों के लिए नए प्रीफिक्स और सफिक्स न खोजें।
इससे पहले भी उन्होंने पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने जब बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित करने के कारण उनकी आलोचना की थी। तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने ‘दा’ संबोधन के प्रयोग पर आपत्ति जताई थी और प्रधानमंत्री से इसके बजाय ‘बंकिम बाबू’ कहने का आग्रह किया था। तब मोदी ने तुरंत स्वीकार करते हुए कहा, ‘मैं बंकिम बाबू कहूंगा। धन्यवाद, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं।’