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7 राज्यों में गवर्नर की नई नियुक्तियों के पीछे की कहानी, जानिए

मोदी सरकार की नई नियुक्तियों में वह राज्य भी शामिल हैं, जहां अगले दो महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

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7 राज्यों के राज्यपाल बदले गए।

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गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 7 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों की नई नियुक्तियां और फेरबदल किया। इसमें दिल्ली और नागालैंड को नए राज्यपाल मिलना शामिल है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह तमिलनाडु के गवर्नर रहे आरएन रवि को बंगाल भेजा गया है। बोस को नई नियुक्ति नहीं दी गई है। इसी तरह से बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को भी हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ट) सैयद अता हसनैन को राज्यपाल बनाया गया है, जबकि आरिफ खान को कहीं नियुक्ति नहीं मिली है।

 

ऐसे में इन नई नियुक्तियों में वह राज्य भी शामिल हैं, जहां अगले दो महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल शामिल हैं। राज्यपालों के फेरबदल और नियुक्तियों से इन चुनावी राज्यों पर क्या असर पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी।  

 

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नियुक्तियों में क्या खास है?

इस फेरबदल में सबसे खास नियुक्ति आरएन रवि की है। रवि को तमिलनाडु से हटाकर पश्चिम बंगाल का गवर्नर बनाया गया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस ने गुरुवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया। 

तमिलनाडु में आरएन रवि

आरएन रवि फिलहाल तमिलनाडु के गवर्नर हैं। उनके गवर्नर पहते तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार के साथ आए दिन टकराव होता रहा। रवि दो बार तो विधानसभा को संबोधित करने पहुंचे, लेकिन वह बिना भाषण दिए ही विधानसभा से वापस चले लगे। इसके अलावा तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर की नियुक्तियों को लेकर आए विधेयक को लेकर भी डीएमके सरकार के साथ उनकी ठनी रही। ऐसे में देखना होगा कि उनकी पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार के साथ कैसी बनती है?

 

उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोस के इस्तीफे पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अभी मुझे सूचित किया है कि आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार मुझसे राय नहीं ली है। ये केंद्र का एकतरफा फैसला है।

ममता और बोस के बीच सामने आए थे विवाद

बोस के कार्यकाल के दौरान कई बार ममता सरकार और राजभवन के बीच मतभेद भी सामने आए थे। विशेष रूप से विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों, प्रशासनिक हस्तक्षेप और कुछ संवैधानिक मुद्दों को लेकर विवादों की खबरें आती रही हैं।

 

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उधर, लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने भी इस्तीफा दिया। उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। लद्दाख में विनय कुमार सक्सेना को उपराज्यपाल बनाया गया है। वीके सक्सेना इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल थे। दिल्ली में पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। 

महाराष्ट्र को भी मिला नया राज्यपाल

महाराष्ट्र में तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेजा गया है, जबकि तेलंगाना में अब हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को राज्यपाल बनाकर भेजा गया है। हिमाचल प्रदेश में लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता भेजा गया है। वहीं, नागालैंड में वरिष्ठ बीजेपी नेता औप बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नंद किशोर यादव को राज्यपाल बनाया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

 

केंद्र की मोदी सरकार ने यह बदलाव राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में किए हैं। इन राज्यों में आने वाले महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाली हैं। केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों के जरिए राज्यपालों की भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश की है।


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