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NALSAR ने CJI सूर्यकांत को बनाया चीफ गेस्ट, छात्रों का डिग्री लेने से इनकार

NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि CJI सूर्यकांत का विरोध किया है। छात्रों ने उनके बयानों पर आपत्ति जताते हुए मैनेजमेंट को पत्र दिए हैं।

CJI Surya Kant

सीजेआई सूर्यकांत और छात्र विरोध, Photo Credit: Social Media

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तेलंगाना के हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने दीक्षांत समारोह का विरोध किया है। इस समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को चीफ गेस्ट के रूप में बुलाया गया है जिसके खिलाफ छात्रों ने आवाज उठाई है। छात्रों का कहना है कि दिल्ली के 'चलो संसद' प्रदर्शन में पुलिस की ज्यादती के मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि उन्हें वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है और उनके पास बिल्कुल समय नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपना और दूसरों का समय बर्बाद न करें। छात्रों का मानना है कि ऐसे बयानों वाले व्यक्ति से डिग्री लेना यूनिवर्सिटी के संविधान और न्याय के नियमों के खिलाफ है।

 

NALSAR यूनिवर्सिटी में यह नियम बहुत पुराना है। हर साल दीक्षांत समारोह में देश के CJI ही मुख्य अतिथि बनकर आते हैं और स्टूडेंट्स को डिग्री देते हैं। इस बार साल 2026-27 के दीक्षांत समारोह के लिए CJI सूर्यकांत का नाम तय हुआ है। इसके बाद स्टूडेंट्स ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। अभी तक दीक्षांत समारोह की पक्की तारीख तय नहीं हुई है स्टूडेंट्स ने पहले ही यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को अपनी नाराजगी जता दी है।

 

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स्टूडेंट्स की ओर से सौंपे गए छह पत्र

इस मामले को लेकर स्टूडेंट्स ने मिलकर यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन को पूरे छह अलग-अलग लेटर्स सौंपे हैं। यूनिवर्सिटी के अलग-अलग बैच के स्टूडेंट्स ने ये लेटर्स दिए हैं। इसकी शुरुआत 23 जुलाई को पहले लेटर से हुई थी। इस लेटर को वाइस-चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रोफेसरों और बाकी मैनेजमेंट को भेजा गया था।

 

सबसे पहले वाले लेटर में उसी बात का जिक्र किया गया है। CJI सूर्यकांत ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए 'चलो संसद' धरने और पुलिस की मारपिटाई के मामले की सुनवाई में यह बात कही थी। जब वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई का वीडियो दिखाना चाहा तब चीफ जस्टिस ने साफ कह दिया था कि उन्हें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है और उनके पास उसे देखने का वक्त नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बोल दिया था कि वे अपना और कोर्ट का समय खराब न करें। स्टूडेंट्स का मानना है कि कोर्ट में इस तरह की बातें होना ठीक नहीं है।

डिग्री लेने से इनकार की वजह

इस दिन यूनिवर्सिटी के अपने नियम और संविधान की बातें साफ दिखनी चाहिए। स्टूडेंट्स ने कहा कि जिस इंसान ने पुलिस की हिंसा पर ध्यान न देने की बात कही हो उनके हाथों से अपनी डिग्री लेना उनको सही नहीं लगता। उन्होंने यूनिवर्सिटी में इसके उलट बातें सीखी हैं। स्टूडेंट बार काउंसिल के एक सदस्य ने बताया कि वे चीफ जस्टिस के पद की इज्जत करते हैं। वे ऐसी किसी भी बात का समर्थन नहीं कर सकते जो उनके पढ़े हुए नियमों के खिलाफ हो।

 

पहला लेटर देने के बाद बाकी कक्षाओं के स्टूडेंट्स ने भी पांच और लेटर्स दिए। इन सभी ने पहले वाले लेटर की बात का पूरा समर्थन किया। उन्होंने मैनेजमेंट से कहा कि वे चीफ गेस्ट के नाम पर फिर से सोच-विचार करें। स्टूडेंट्स का दावा है कि इन सभी लेटर्स के पीछे यूनिवर्सिटी के सैकड़ों स्टूडेंट्स की ताकत है। एक स्टूडेंट ने बताया कि हर एक लेटर पर 70 से 80 स्टूडेंट्स के साइन हैं। 

 

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प्रशासन की चुप्पी

स्टूडेंट्स की तरफ से इतने सारे लेटर्स भेजे जा चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई भी जवाब नहीं मिला है। वाइस-चांसलर श्रीकृष्ण देव राव से बात करनी चाही तो उनकी तरफ से कोई बात नहीं हो पाई। वहीं दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी भी लेटर या शिकायत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। आखिर में स्टूडेंट्स ने यह भी कहा है कि अगर एडमिनिस्ट्रेशन चाहे तो वे स्टूडेंट्स के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस बारे में आराम से बातचीत कर सकते हैं।

 


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