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'इस्तीफे से क्या होगा...', NEET कांड के पीड़ित परिवार क्या चाहते हैं?

जिन लोगों ने नीट पेपर लीक केस के बाद अपने बच्चों को खो दिया, वे क्या चाहते है, उनकी मांगें क्या हैं? पढ़ें रिपोर्ट।

Neelam Chaturvedi

आकांक्षा चतुर्वेदी की मां नीलम चतुर्वेदी। Photo credit: ANI

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NEET -UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या कर चुके छात्रों के कई परिवारों ने कहा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन्हें कोई संतोष नहीं मिला है। उनका कहना है कि सरकार ने छात्रों और उनके माता-पिता के दर्द को कभी समझा ही नहीं।

परिवारों ने दिल्ली में पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज का भी गुस्सा जताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों के दबाव के बाद ही मंत्री का इस्तीफा स्वीकार किया। ज्यादाअभिभावक शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं, भविष्य में पेपर लीक या अन्य गड़बड़ियों के कारण परीक्षाएं रद्द न हों।

उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के एक 21 वर्षीय NEET अभ्यर्थी के पिता अनूप मिश्रा ने कहा कि उनका बेटा तीसरी बार NEET दे रहा था। उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तारीफ की, भले ही पुलिस ने उन पर बर्बर हमला किया हो। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए शिक्षा सुधारों की मांग की। ऋतिक मिश्रा के पता ने कहा कि उनका बेटा मानसिक तनाव से परेशान होकर खुदकुशी की।

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'मुआवजे से बेटा तो वापस नहीं लौटेगा'

पिता ने बताया कि पत्नी अभी भी सदमे में है और लखनऊ के अस्पताल में भर्ती है।उन्होंने कहा, 'किसी भी मुआवजे से मेरा बेटा वापस नहीं आ सकता। खालीपन कभी नहीं भर सकता। उम्मीद है कि यह आंदोलन भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकेगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधान शुरुआत में ही इस्तीफा दे देते तो जंतर मंतर पर हिंसा नहीं होती।

'मेरी बेटी नहीं लौट पाएगी...'

नागपुर में 18 वर्षीय NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी ने खुदकुशी की थी। उनकी मां नीलम चतुर्वेदी ने कहा कि अपनी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। 

नीलम चतुर्वेदी, आकांक्षा चतुर्वेदी की मां:-
इस्तीफा ठीक है, लेकिन मैं उन बच्चों को धन्यवाद देना चाहती हूं जिन्होंने मेरी बेटी के लिए लड़ाई लड़ी और पुलिस की गोली-लाठियां झेलीं। पेपर लीक करने वालों और छात्रों पर हमला करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

नीलम चतुर्वेदी के पिता ने कहा, 'आज न्याय हुआ। इस्तीफा मेरी बेटी को वापस नहीं लाएगा, लेकिन कम से कम उसकी आत्मा को शांति तो मिलेगी।'

मुआवजे पर उन्होंने बताया कि रिश्तेदारों की मदद से एजुकेशन लोन चुकाया गया। अगर मुआवजा मिला तो बाकी कर्ज चुकाएंगे। उनकी पत्नी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुईं थीं। 

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'बच्चों के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा'

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले की नीट अभ्यर्थी कामाक्षी ने खुदकुशी की थी। उनके पिता ने कहा, 'सरकारों को छात्रों की तैयारी का दर्द समझना चाहिए और सख्त कदम उठाने चाहिए। इतने बच्चों की मौत के बाद भी सरकार अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी। केवल छात्रों के जंतर मंतर पर डटे रहने और लाठियां खाने के बाद ही सरकार मानी। प्रधान ने खुद इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि बच्चों के दबाव में दिया। मुआवजा मेरी बेटी को वापस नहीं ला सकता।'

'बिना किसी गलती के मर गई बेटी...'

देहरादून में सिर्फ 23 साल की उम्र में रिया कुमारी ने खुदकुशी कर ली थी। उनकी मां ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से यह तो साफ हो गया कि सरकार ने अपनी गलती मान ली है लेकिन देर से।

मेरी बेटी बिना किसी गलती के मर गई। यह उसका आखिरी मौका था, वह गहरे डिप्रेशन में थी। सरकार हमारे दर्द को नहीं समझ सकती। मुआवजा उसे वापस नहीं ला सकता, लेकिन सुधार भविष्य की ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं। केंद्र सरकार जिम्मेदार है। 

'वह हमारी इकलौती संपत्ति थी'

बरहामपुर में पिछले हफ्ते Re-NEET परीक्षा में असफल होने के बाद संचिता साहू ने खुदकुशी कर ली थी। उनकी उम्र 20 साल थी। उनकी मां ने कहा, 'वह हमारी इकलौती संपत्ति थी। प्रधान के इस्तीफे से हमें क्या फर्क पड़ता है? लेकिन एक मां के नाते मैं कहूंगी कि NEET में केवल होनहार छात्रों को आना चाहिए, न कि नकल करके आने वालों को।'

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'कम से कम दर्द का अहसास तो हुआ...'

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी  चंचल भारती ने खुदकुशी कर ली। बहन की आत्महत्या के बाद उनके भाई ने कहा, 'CJP आंदोलन की वजह से लोगों को NEET अभ्यर्थियों के दर्द का अहसास हुआ।'चंचल का सुसाइड नोट वायरल हुआ था, जिसमें लिखा था, 'अब और नहीं सह सकती।' उन्होंने दावा किया कि उनकी बहन को कुछ न्याय मिल गया।

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