अगर आप नया वोटर कार्ड बनवाने या पहली बार वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की सोच रहे हैं तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। चुनाव आयोग ने रातोंरात एक बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने अपने ECINET पोर्टल पर फॉर्म 6 में बड़ा बदलाव करते हुए उसमें से अतिरिक्त '
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घोषणा पत्र' हटा दिया है। यह कदम उन राज्यों में लागू किया गया है जहां स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद चुनाव आयोग ने सफाई भी दी है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से एक रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग की ओर से लिए गए फैसलों खासकर SIR को लेकर 14 बार आपत्तियां जताई थी। इसके बाद से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है।
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क्या किया गया है बदलाव?
कुछ दिन पहले 26 सितंबर को आयोग ने यह साफ किया था कि जिन राज्यों में SIR का काम खत्म हो चुका है वहां अब नियमों के मुताबिक, केवल सामान्य फॉर्म 6 ही भरा जाएगा। आयोग के इस फैसले के 4 दिन बाद यानी बुधवार देर रात पोर्टल पर यह बदलाव लागू कर दिया गया। अब नए एप्लीकेंट्स को पुराना रिकॉर्ड साबित करने वाला एक्सट्रा फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा।
ECI के तरफ से जारी बयान
ECI के एक अधिकारी ने इस मामले पर बयान जारी कर सफाई दी है। अधिकारी ने कहा है कि SIR के दौरान या SIR के बाद के समय में, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। डिक्लेरेशन फॉर्म एक अतिरिक्त दस्तावेज था जिसे उन राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में मांगा गया था। वहां 24 जून 2025 के SIR आदेश और उसके बाद के आदेशों के अनुसार किया गया था। साथ ही यह भी कहा कि जहां SIR पूरा हो चुका है। वहां डिक्लेरेशन फॉर्म की कोई जरूरत नहीं होगी।
आपको बता दें कि पहली बार वोटर बनने वाले नागरिकों या नए पंजीकरण के लिए कानूनी रूप से फॉर्म 6 भरा जाता है। इसमें नाम, जन्म तिथि, पता, मोबाइल नंबर, आधार, जन्म प्रमाण पत्र और पता प्रमाण की आवश्यकता होती है। SIR के दौरान आयोग ने इस मूल फॉर्म के साथ 'एनेक्जर डी' के नाम से एक अलग से घोषणा पत्र जोड़ दिया था। इसे हटा दिया गया है। आयोग का कहना है कि इससे लोगों की परेशानी कम होगी।
'एनेक्जर डी' में क्या पूछा जा रहा था?
SIR प्रक्रिया के तहत नए आवेदकों से उनके पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड की जानकारी मांगी जा रही थी। इसमें एप्लीकेंट को तीन में से एक ऑप्शन चुनना होता था। पहला, क्या उसका नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट में मौजूद था? दूसरा, यदि उसका नाम नहीं था तो क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पुरानी लिस्ट में था? और अंतिम, यदि खुद का या परिवार के किसी सदस्य का नाम पुरानी लिस्ट में नहीं था, तो तीसरा विकल्प चुनना पड़ता था।
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विवाद क्या था?
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि फॉर्म 6 एक कानूनी फॉर्म है जो 'निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960' के तहत आता है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव केवल आयोग के आदेश से नहीं बल्कि नियमों में कानूनी संशोधन के जरिए ही किया जा सकता है। पोर्टल पर इस घोषणा पत्र को भले ही 'गैर-जरूरी' बताया गया था लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे भरे बिना आवेदक का फॉर्म ऑनलाइन जमा ही नहीं हो पा रहा था, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही थी।
इससे पहले ECINet पर महाराष्ट्र CEO ने भी सवाल उठाया था और इसमें बदलाव की मांग की थी। महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। महाराष्ट्र CEO ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में 4 बदलाव की मांग की है। इन बदलावों में मुख्य रूप से यह कि चुनाव अधिकारियों को उन मामलों में अपने स्तर पर फैसला लेने की सुविधा मिलेगी जिसकी अनुमति कानून पहले से देता है।