दिल्ली की विशेष NIA कोर्ट ने म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस में तिहाड़ जेल में बंद 7 लोगों को 1 महीने के लिए बेल दी है। इसमें 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं जिन्हें डिफॉल्ट बेल दी गई है। सभी आरोपियों की रिहाई के संबंध में कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी है। तिहाड़ जेल से निकलने के बाद जल्द ही वह अपने परिवारों से मिलने के लिए अपने देश रवाना होंगे।
इन सभी लोगों पर बिना वैध परमिट भारत-म्यांमार सीमा पार करने का आरोप है। साथ ही वहां के उग्रवादी समूहों को ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग देने का भी गंभीर आरोप लगा है। ये सभी लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। बाद में मिजोरम के रास्ते अवैध तरीके से म्यांमार के प्रतिबंधित क्षेत्रों में दाखिल हुए थे।
यह भी पढ़ें: 40 करोड़ से बना था साइकिल ट्रैक, अब बन गया अवैध पार्किंग का अड्डा
जानिए क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, ये सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा के बहाने भारत पहुंचे थे। इसके बाद इन्होंने नियम तोड़ते हुए बिना किसी सरकारी मंजूरी के मिजोरम के संवेदनशील बॉर्डर इलाकों में घुस गए। साथ ही गैर-कानूनी तरीके से म्यांमार की सीमा में चले गए। इन पर आरोप है कि वहां जाकर ये लोग स्थानीय गुटों और बागियों को ड्रोन उड़ाने और हथियार चलाने तक की ट्रेनिंग दी। भारत के वीजा और इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन करने की वजह से FRRO ने इन पर जुर्माना भी लगाया था।
UAPA की धाराएं नहीं लगीं
NIA ने अपनी चार्जशीट में इन आरोपियो पर UAPA के तहत मामला दर्ज नहीं किया है। जांच एजेंसी का मानना था कि इन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है। साथ ही इस बात से भी इनकार कर दिया कि इन लोगों ने सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा या नागरिकों को कोई नुकसान पहुंचाया है।
यह भी पढ़ें: भारतीय कैसे, कहां और कितना खर्च कर सफर करते हैं? MoSPI के आंकड़ों से समझिए
कोर्ट ने क्यों दी 'डिफॉल्ट बेल'?
कानून के मुताबिक UAPA जैसे मामलों में जांच एजेंसी को 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल करना होता है। तय समयसीमा के भीतर जांच एजेंसी की तरफ से चार्जशीट दाखिल न कर पाने की वजह से कोर्ट ने आरोपियों को 'डिफॉल्ट जमानत' का कानूनी अधिकार दिया। हालांकि, 1 महीने बाद इन्हें वापस लौटने और कोर्ट की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।