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'उसकी हत्या हुई है...', सुरेंद्र कोली की आत्महत्या पर क्या कह रहे पीड़ित परिवार?

सुरेंद्र कोली 19 साल तक जेल में रहा। जब वह जेल से बाहर आया तो खुदकुशी कर बैठा। पढ़ें उसकी मौत पर पीड़ित परिवारों का क्या कहना है।

Surendra Koli

सुरेंद्र कोली। Photo Credit: PTI

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निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। निठारी कांड के एक पीड़ित परिवार ने इस पर सवाल उठाए हैं। नोएडा में एक पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्हें कोली की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या लगती है। उनका कहना है कि जेल से रिहा होने के बाद कोली अपने परिवार के साथ शांति से रह सकता था, इसलिए उसके आत्महत्या करने की कोई वजह नजर नहीं आती।

 

पीड़ित पिता ने कहा कि सुरेंद्र कोली चाहता तो चाय की दुकान चलाकर भी अपने परिवार का पालन कर सकता था। उनका मानना है कि उसे जानबूझकर मारा गया है। 19 साल जेल में रहने और फांसी की सजा से बाल-बाल बचने के बाद सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार में लालमाता मंदिर के पास अपनी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला था।

यह भी पढ़ें: निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या, 10 महीने पहले हुई थी रिहाई

पीड़ित पिता, निठारी केस:-
क्या उसने सच में आत्महत्या की या उसे मार दिया गया? किसी ने उसे मरवाया। जेल से छूटने के बाद वह आत्महत्या क्यों करता? वह अपने बच्चों और बूढ़ी मां के साथ शांति से रह सकता था। उसे मारा गया। उसे क्या चिंता थी? वह तो चाय की दुकान पर काम करके भी अपने परिवार के लिए आसानी से पैसे कमा सकता था। आखिर उसके बच्चे भी तो थे।

पीड़ित परिवार ने क्या कहा?

पीड़ित परिवार में से एक शख्स ने कहा कि जब सुरेंद्र कोली से पूछताछ हुई थी तो उसने अपना गुनाह कबूल किया था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सुरेंद्र कोली से पूछा कि उसने उनकी बेटी को कैसे बहलाया तो कोली ने माफी मांगते हुए कहा कि यह गलती से हो गया।

पीड़ित पिता, निठारी केस:-
जब आमना-सामना हुआ तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। मैंने उससे पूछा, 'तुमने मेरी बेटी को कैसे बहलाया-फुसलाया? तुमने उसके साथ क्या किया?' उसने जवाब दिया, 'मुझे माफ कर दीजिए। वह गलती से आ गई थी। गलती हो गई।'

यह भी पढ़ें: 'एस्कॉर्ट, हत्या, सुरेंद्र कोली,' निठारी कांड से बरी पंढेर ने पहली बार क्या कहा?

कैसे बच्चों को अपने पास बुलाता था सुरेंद्र कोली?

पीड़ित पिता ने यह भी बताया कि कोली बच्चों को खिलौने और फूल दिखाकर अपने पास बुला लेता था। उसका मानना था कि बच्चे चाहे किसी भी घर के हों, ऐसी चीजें देखकर उनके पास चले जाते हैं। वह बड़ी उम्र की महिलाओं और पुरुषों को काम दिलाने के बहाने पैसों का लालच देकर फंसाता था।

पीड़ित पिता, निठारी केस:-
असलियत तो यह है कि अगर आप बच्चों को फूल या खिलौने दिखाएं तो परिवार चाहे कितना भी अमीर क्यों न हो, बच्चे उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। वह उन्हें खिलौनों या फूलों का लालच देकर फंसाता था। जहां तक बालिग महिलाओं और पुरुषों की बात है तो वह उन्हें काम का बहाना बनाकर और मनचाहे पैसे का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।

सुरेंद्र कोली कौन था?

सुरेंद्र कोली को 13 में से आखिरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को बरी किया था, जिसके बाद वह कासना जेल से रिहा हुआ था। सुरेंद्र कोली नोएडा के नितारी कांड के मुख्य आरोपी था।

 

 

 

सुरेंद्र कोली ने क्या किया था?

साल 2006 में एक घर के पीछे नाले से कई बच्चों की हड्डियां मिली थीं। पुलिस ने कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार कर लिया। सुरेंद्र कोली पर आरोप था कि वह बच्चों को घर में बुलाकर मार देता था, उन्हें खा लेता था। अदालतों ने उसे 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई। एक बार फांसी लगने से सिर्फ कुछ घंटे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

 

यह भी पढ़ें: निठारी कांड: सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी, तुरंत रिहा करने का आदेश

19 साल जेल में रहा सुरेंद्र कोली 

सुरेंद्र कोली करीब 19 साल जेल में रहा। अदालत से उसने कहा कि पुलिस ने जबरदस्ती कबूलनामा लिखवाया और सबूत कमजोर थे। जांच में अंग व्यापार वाला दावा गलत साबित हुआ। इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने एक-एक कर सभी मामलों में उसे बरी कर दिया। 

बिखर गया था सुरेंद्र कोली का परिवार 

नवंबर 2025 में आखिरी केस में भी सुरेंद्र कोली बरी होने के बाद जेल से बाहर आया। उसकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी और बेटा जेल जाने के बाद पैदा हुआ था जिसे उसने कभी नहीं देखा। 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में लाल माता मंदिर के बाहर अपनी छोटी चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली फांसी लगाकर मरा मिला। कई सालों की जेल, बदनामी और परिवार के बिखरने के बाद वह ज्यादा दिन जी नहीं सका।

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