NCR की सीमा ना बढ़ी, ना घटी, फिर 5000 करोड़ रुपये खर्च करके क्या काम होगा?
NCRPB की मीटिंग के बाद यह तय हो गया है कि NCR की सीमा नहीं बदलेगी और हरियाणा के जिलों को इससे बाहर भी नहीं किया जाएगा। अब 4 नए शहर बसाने की योजना है।

मीटिंग में मौजूद नायब सिंह सैनी, मनोहर लाल खट्टर और रेखा गुप्ता, Photo Credit: Social Media
कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की आगामी बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमा कम की जा सकती है। सबसे ज्यादा चर्चा हरियाणा के कुछ जिलों को NCR से बाहर किए जाने की थी। मंगलवार को हुई NCRPB की बैठक में यह तय हो गया है कि NCR की बाउंड्री में कोई बदलाव नहीं होगा। इसका मतलब है कि ना तो NCR की सीमा घटेगी और ना ही इसमें बढ़ोतरी की जाएगी। रीजनल प्लान 2041 को फिलहाल मंजूरी नहीं मिल पाई। इसके इतर अगले पांच साल में 5000 करोड़ रुपये की लागत से 4 नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने की योजना बनाई गई है। ये शहर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बसाए जाएंगे।
इस बैठक में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ए के शर्मा और राजस्थान सरकार के मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी शामिल हुए। इस बैठक में फैसला लिया गया कि NCR की मौजूदा क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, क्षेत्रीय योजना-2041 को अंतिम रूप देने के लिए एक उपसमिति गठित करने पर भी सहमति बनी।
आगे कैसे होगा NCR का काम?
अधिकारियों के अनुसार, NCR को तीन जोन में बांटा जाएगा। इसके तहत प्रदूषण संबंधी और अन्य प्रतिबंध केवल दिल्ली और उससे सटे केंद्रीय NCR क्षेत्रों में लागू होंगे जबकि NCR में शामिल लेकिन राजधानी से अपेक्षाकृत दूर स्थित जिलों को इन प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी। NCRPB ने हरियाणा के उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जिसमें करनाल, जींद, पानीपत, महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे पांच बाहरी जिलों को NCR से बाहर करने की मांग की गई थी। इसके बजाय, सेंट्रल NCR का विकास दिल्ली के बाहर किया जाएगा, जो ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से बने रिंग कॉरिडोर की बाहरी सीमा से पांच किलोमीटर तक विस्तारित होगा।
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प्रस्तावित क्षेत्रीय योजना-2041 के अनुसार, सेंट्रल NCR को NCR के गोल्डन रिंग ऑफ अपॉर्च्युनिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत अगर भविष्य में प्रदूषण संबंधी प्रतिबंध लागू करने की जरूरत पड़ती है तो संबंधित प्राधिकरणों से उन्हें केवल सेंट्रल NCR क्षेत्र में लागू करने का अनुरोध किया जाएगा ताकि NCR के दूरदराज के जिलों को विकास संबंधी बाधाओं का सामना न करना पड़े।
2041 वाले प्लान पर क्यों नहीं बनी बात?
बहुप्रतीक्षित क्षेत्रीय योजना-2041 को मंगलवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई NCRPB की बैठक में मंजूरी नहीं मिल सकी क्योंकि भाग लेने वाले राज्यों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इस मीटिंग के बाद मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि बैठक में राज्यों ने क्षेत्रीय योजना 2041 के हर पहलू पर चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि दो महीने बाद एक और बैठक होगी जिसमें इसे अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा।
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क्या है नमो शहरों वाला प्लान?
NAMO शहरों के नाम से विकसित किए जाने वाले चार नए ग्रीनफील्ड शहरों के बारे में योजना है कि इन्हें आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर शहरी सेंटर के रूप में विकसित किया जाए। मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि बढ़ती आबादी को समायोजित करने के लिए इन चार ‘नमो नोड्स’ का विकास रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के साथ किया जाएगा। ‘सिटी नोड’ एक ऐसा प्लांड सिटी सेंटर होता है, जो परिवहन नेटवर्क के माध्यम से अन्य शहरों से जुड़ा होता है और जहां घर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में NCR की आबादी लगभग 7.5 करोड़ है, जो अगले 15 साल में बढ़कर 15 करोड़ तक पहुंच सकती है। आने वाले दशकों में यह इस क्षेत्र के तेजी से शहरीकृत होने की भी संभावना है और साल 2031 तक यहां की लगभग 57 प्रतिशत आबादी के शहरी क्षेत्र में रहने की संभावना है। 2041 तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 67 प्रतिशत हो जाने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में भीड़ कम करने और तेजी से बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के दोहरे मकसद को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्शन बेस्ड गतिविधियों पर आधारित चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे।
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9 CMA की पहचान
उन्होंने बताया कि NCRPB ने छह पड़ोसी राज्यों में फैले नौ काउंटर मैग्नेट एरिया (CMA) की भी पहचान की है। इनमें हिसार, अंबाला, कोटा, जयपुर, पटियाला-राजपुरा, कानपुर-लखनऊ, बरेली, ग्वालियर और देहरादून शामिल हैं। सीएमए ऐसे शहरी केंद्र होते हैं जिन्हें महानगरीय क्षेत्रों पर आबादी के पलायन और आर्थिक दबाव को कम करने के लिए विकसित किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में यह इलाका भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 प्रतिशत का योगदान देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।
यह देश का एकमात्र और दुनिया के उन चुनिंदा इलाकों में से एक है, जहां मेट्रो रेल, रैपिड रेल और कई एक्सप्रेसवे मौजूद हैं। ये साधन बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्रीय योजना का मकसद एक नए और जीवंत भारत के लिए भविष्य के अनुकूल NCR का विकास करना है। इसके लिए नागरिकों पर केंद्रित ऐसा बुनियादी ढांचों को तैयार किया जाएगा जो सामंजस्यपूर्ण, पर्यावरण के अनुकूल, स्मार्ट और डिजिटल तकनीक पर आधारित हों। साथ ही, इसका लक्ष्य टिकाऊ विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए एक आर्थिक रूप से समृद्ध क्षेत्र का निर्माण करना है।
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