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'15 करोड़ अडवांस दे रहे हैं', संजय राउत ने भी कर दिया सांसदों के टूटने का इशारा?

शिवसेना (UBT) के लोकसभा सांसदों के टूटने की खबरों के बीच संजय राउत ने दावा किया है कि इन सांसदों को 15 करोड़ रुपये अडवांस में दिए जा रहे हैं।

sanjay raut and uddhav thackeray

संजय राउत और उद्धव ठाकरे, File Photo Credit: PTI

तृणमूल कांग्रेस में टूट के बाद अगला नाम शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) का चर्चा में है। एक दिन पहले तक शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत दावा कर रहे थे कि उनका कोई सांसद कहीं नहीं जा रहा है। उन्हीं संजय राउत ने अब कहा है कि उनके सांसदों को खरीदने के लिए 15-15 करोड़ रुपये अडवांस में दिए जा रहे हैं। दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के तमाम नेता कह रहे हैं कि पाला बदलने वाले नेताओं का स्वागत किया जाएगा। शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 या 7 सांसदों के शिवसेना में शामिल होने की चर्चा है और अब संजय राउत के बयान के बाद सुगबुगाहट तेज हो गई है। इतना ही नहीं, शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखकर उनसे अपील की है कि ऐसा कोई गुट बनाने वालों को कोई मान्यता न दी जाए।

 

इससे पहले, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के सांसदों के संभावित विद्रोह की अटकलें तब और तेज हो गईं, जब शिवसेना के नेता प्रताप सरनाइक ने संकेत दिया कि बागी सांसदों का स्वागत किया जाएगा और पाला बदलने पर उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इस बीच चर्चाएं तब शुरू हुईं जब संजय राउत दिल्ली पहुंचे। इससे यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि वह पार्टी के कई सांसदों की ओर से अलग समूह बनाने की किसी संभावित कोशिश को रोकने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं।

 

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संजय राउत के ट्वीट से मची खलबली

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देर रात किए गए एक पोस्ट में संजय राउत ने कहा, ‘अपना सपना मनी...मनी! खबर है कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज रात 15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जाएगी। यह चौंकाने वाला और शर्मनाक है!’ इससे पहले संजय राउत और उनकी पार्टी शिवसेना (UBT) के सहयोगी और लोकसभा सदस्य अनिल देसाई ने इस बात को खारिज कर दिया था कि कुछ सांसद अलग गुट बना सकते हैं। बता दें कि शिवसेना (UBT) के कुल 9 लोकसभा सांसद हैं और अगर 6 या उससे ज्यादा सांसद पाला बदलते हैं तो वे भी दो तिहाई वाला तर्क दे सकते हैं।

 

इसी बीच शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने इशारों-इशारों में बागी सांसदों को एक तरह का न्योता दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर सांसद और विधायक जैसे जन-प्रतिनिधियों को अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं है। अगर वे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के आदर्शों में विश्वास करते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा करने को तैयार हैं तो शिवसेना के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। अगर वे भविष्य में कभी ऐसा सोचते हैं, तो हम उन्हें प्राथमिकता देंगे।’ उनकी यह टिप्पणी शिवसेना (UBT) सांसद संजय देशमुख की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात के एक दिन बाद आई।

अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी

संजय राउत 15 करोड़ के ऑफर की बात कर रहे हैं और लोकसभा सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर को एक चिट्ठी लिखकर उनसे अपील की है कि शिवसेना (UBT) को एक दल माना जाए और किसी भी तरह के गुट को कोई मान्यता न दी जाए। उन्होंने संविधान की 10वीं अनुसूची का भी जिक्र किया है।

 

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लोकसभा में शिवसेना (UBT) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, 'शिवसेना (UBT) एक दल है और इसका प्रतिनिधित्व एक अधिकृत नेता और व्हिप के जरिए किया जाता है। ऐसे में आपसे अनुरोध है कि आप किसी भी गुट या टूट हुए समूह को मान्यता या दर्जा न दें जो खुद को पार्टी का प्रतिनिधि बताने की कोशिश करे। अगर ऐसा कोई अनुरोध आपके पास आता है तो पहले शिवसेना (UBT) को अपनी बात रखने का मौका दें। पार्टी के पास पूरा अधिकार है कि वह कानून के मुताबिक, 10वीं अनुसूची का इस्तेमाल कर सके।'


संजय देशमुख ने प्रतापराव जाधव से की मुलाकात

बता दें कि यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख रविवार को मुंबई में उद्धव ठाकरे के आवास पर बुलाई गई बैठक में पारिवारिक कारणों का हवाला देकर शामिल नहीं हुए थे। इस पर कई तरह के सवाल उठने लगे थे। सोमवार को उन्होंने प्रतापराव जाधव से मुलाकात की जिससे उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गईं। शिवसेना (UBT) के नौ में से केवल चार सांसदों के बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बाद पाला बदलने की संभावनाओं को और बल मिला। इस पर संजय राउत ने दावा किया था कि पांच अन्य सांसद डिजिटल माध्यम से और फोन पर बैठक में शामिल हुए थे। मंगलवार को संजय राउत ने कहा कि गलत तस्वीर पेश की जा रही है और जोर देकर कहा कि सभी सांसद मजबूती से पार्टी और उद्धव ठाकरे के साथ हैं।

 

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उनके मुताबिक, सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने जहां बैठक में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया, वहीं ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ऑनलाइन शामिल हुए। संजय राउत ने बताया कि एक और सांसद, संजय जाधव ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि सांसदों ने अपनी मां, बच्चों, साईं बाबा और देवी तुलजाभवानी की शपथ खाकर कहा कि वे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। 

 

संजय राउत ने मंगलवार को नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘शिवसेना (UBT) के सभी सांसद एकजुट हैं और एकजुट रहेंगे।’ किसी भी खतरे की बात को खारिज करते हुए संजय राउत ने किसी भी संकट से निपटने की पार्टी की क्षमता पर भी भरोसा जताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस चर्चा के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने के लिए दिल्ली आए हैं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की तरह अलग समूह बना सकते हैं तो संजय राउत ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया। संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी की 60 साल पुरानी विरासत है और उसका अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन करने का इतिहास रहा है।

'पार्टी बनी रहेगी'

उन्होंने कहा, 'हमने अतीत में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं लेकिन हमारी पार्टी कार्यकर्ता-आधारित पार्टी है। विधायक और सांसद आते-जाते हैं लेकिन पार्टी बनी रहती है। हमारा दिन जब आएगा, हम दिखाएंगे पार्टी कैसे तोड़ी जाती है।' उन्होंने पार्टियों को तोड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर आरोप लगाया और कहा कि ऐसी प्रथा देश की राजनीतिक सेहत के लिए बुरी है। वहीं, चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से छह से सात सांसद सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने के इच्छुक हैं और फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।

 

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सूत्रों का यह भी कहना है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचने वाले थे। शिंदे गुट के एक नेता ने दावा किया कि छह से सात सांसद पाला बदल सकते हैं। नेता ने दावा किया कि जिन सांसदों के पाला बदलने की चर्चा है, वे पार्टी में आदित्य ठाकरे को और अधिक महत्व दिए जाने की संभावना से असहज हैं।


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