15 साल की सरकार चलाने के बाद सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस (TMC) कोलकाता से दिल्ली तक बिखरती दिख रही है। पहले पश्चिम बंगाल की विधानसभा में टीएमसी के विधायक दो धड़े में बंट गए और फिर लगभग वैसा ही लोकसभा में हुआ। दूसरे तरफ अभिषेक बनर्जी और TMC के तमाम नेता मुकदमेबाजी में फंसे हुए हैं और आए दिन कोर्ट, कचहरी और एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं। इस बीच यह भी देखने को मिल रहा है कि TMC असल में कई टुकड़ों में बंट सकती है। एक धड़े ने खुद को अलग टीएमसी बताया है तो दूसरे ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का एलान किया है।
बंगाल चुनाव के नतीजे आए लगभग डेढ़ महीने हो चुके हैं। इन डेढ़ महीने में वह पार्टी बिखरती दिख रही है जो डेढ़ दशक से सत्ता पर काबिज थी। स्थानीय स्तर पर नगर निकायों तक से TMC नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा में दो गुट बन गए हैं और लोकसभा के 20 सांसदों ने बगावत कर दी है। राज्यसभा के तीन सांसद इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के करीब आ गए हैं। हालांकि, TMC में हो रही बगावत के बाद बागी नेता किसी एक धड़े में नहीं जा रहे हैं। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना की बगावत में यही हुआ था कि पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी लेकिन यहां कई धड़े बनते दिख रहे हैं।
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BJP के साथ जाएंगे कुछ नेता
राज्यसभा सांसदों के मामले में देखा जा रहा है कि जिन नेताओं ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दिया वे स्पष्ट तौर पर बीजेपी के साथ हैं। कहा जा रहा है कि ये तीनों नेता अब बीजेपी के ही टिकट पर राज्यसभा जा सकते हैं और समय आने पर वे बीजेपी में शामिल हो जाएंगे। इनमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के नाम शामिल हैं। अपने इस्तीफे के समय इन तीनों ने बीजेपी का नाम जरूर लिया। सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता हिमंत बिस्व सरमा से मुलाकात की, सुखेंदु शेखर रे ने पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार की तारीफ की और प्रकाश बड़ाईक ने बीजेपी को मिले बहुमत का जिक्र किया।
ऐसे में इन तीनों नेताओं के बारे में यही कहा जा रहा है कि ये देर-सबेर ही सही बीजेपी में शामिल हो जाएंगे और उसी के टिकट पर आगामी चुनाव लड़ते दिखेंगे। जो तीन राज्यसभा सीटें खाली हुई हैं उन पर उपचुनाव होने हैं और संख्या के आधार पर अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी इन नेताओं को अपने टिकट पर जिता भी सकती है। यही वजह है कि इन तीनों का मामला सुरक्षित है और बस समय बीतने का इंतजार है।
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कई धड़ों में बंट जाएगी TMC?
अलग-अलग खेमेबाजी के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बन चुके ऋतब्रत बनर्जी अलग ही सुर अलाप रहे हैं। ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि उनके साथ खड़े विधायक NCPI में शामिल नहीं होंगे। अब 64 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले ऋतब्रत का कहना है कि NCPI में विलय का फैसला उन सांसदों का है लेकिन विधायकों ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है। ऋतब्रत ने यह भी कहा है कि उन सांसदों से उनकी कोई बात नहीं हुई है और विलय की जानकारी उन्हें भी मीडिया से ही मिली है।
उन्होंने इस बारे में कहा है, 'जहां तक विधायकों की बात है तो उनके NCPI में जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।' बता दें कि ऋतब्रत बनर्जी ने बार-बार यही कहा है कि वह टीएमसी में हैं और वह चाहते हैं कि ममता बनर्जी उनकी मार्गदर्शक बनें। हालांकि, वह अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को बार-बार खारिज करते रहे हैं।
लोकसभा में हो गई गफलत
लोकसभा में TMC के सांसद दो धड़े में बंट गए हैं। 20 सांसद काकोली घोष दस्तीदार के साथ और 8 सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ। हालांकि, दावा है कि 20 वाले धड़े में कुछ और सांसद शामिल हो सकते हैं। काकोली घोष की अगुवाई वाले 20 सांसद स्पष्ट तौर पर बीजेपी के नेताओं से मिले, भूपेंद्र यादव के घर पर ही मीटिंग हुई और पहले इन नेताओं ने कहा कि वे संसद में अलग बैठने की मांग कर रहे हैं और वे TMC में रहकर ही एनडीए का समर्थन करेंगे। हालांकि, बाद में उन्होंने NCPI में अपने विलय का एलान किया। अब यह मामला लोकसभा के स्पीकर के पास है और उनको ही इस पर फैसला करना है।
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इसको लेकर कानूनी दांवपेच चलने की उम्मीद है। टीएमसी इस पर सवाल उठा रही है और उसका तर्क है कि मूल पार्टी का विलय नहीं हो रहा है तो इसे विलय माना ही नहीं जाना चाहिए। वहीं, बगावत करने वाले सांसद दो तिहाई बहुमत के साथ-साथ शिवसेना और एनसीपी वाला उदाहरण भी दे रहे हैं। हालांकि, अभी भी इस मामले पर फैसला होना बाकी है।