देश की राजनीति में तेजी से बदलाव आ रहा है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्यों की सियासत बदल रही है। नए समीकण बन रहे हैं तो कई बिगड़ रहे हैं। इसके साथ ही इंडिया गठबंधन की राजनीति भी करवट ले रही है। एक साल पहले तक जिस गठबंधन में कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को कम आंका जाता था, अब उसी गठबंधन के नेता राहुल गांधी में भविष्य ढूंढने लगे हैं। यह बदलाव कोई एक झटके में नहीं हुआ है, बल्कि कई बड़े और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बाद हुआ है। इंडिया गठबंधन में शामिल नेता राहुल गांधी में भविष्य ढूंढने लगे हैं।
दरअसल, इसको समझने के लिए ढेढ महीने से लेकर चार साल पहले जाना होगा। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट के बाद ही हुई। 29 जून 2022 को तत्कालीन शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में लगभग 40 विधायकों ने उद्धव ठाकरे और उनकी सरकार से बगावत कर दी। एकनाथ शिंदे बीजेपी के सहयोग से अपने समर्थक विधायकों को लेकर असम के गुवाहाटी चले गए थे। इस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई और उद्धव को 29 जून 2022 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
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चार साल पहले टूटी थी 'शिवसेना'
इसके एक दिन बाद ही 30 जून को एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। बीजेपी की मदद से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिंदे ने कुछ दिनों बाद ही 'शिवसेना' पार्टी पर अपना दावा ठोंक दिया। उन्होंने फरवरी 2023 में चुनाव आयोग के सामने संख्याबल के हिसाब से शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह पर दावा किया।
चुनाव आयोग ने आधिकारिक शिवसेना और उसका चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' शिंदे को दे दिया। इसके बाद शिवसेना हमेशा के लिए टूट गई। उद्धव ठाकरे के गुट का नाम शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) आई। इसके बाद के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को करारी हार का सामना करना पड़ा और उसके हिस्से में महज 19 विधायक आए। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में ठाकरे इंडिया गठबंधन में रहते हुए जरूर 9 सांसद जीतने में सफल रहे।
अब शिवसेना (UBT) के भी टूट की चर्चाएं
अब महाराष्ट्र में शिवसेना का तोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को भी तोड़ने की चर्चाएं जोरों पर चल रही हैं। चर्चा है कि बीजेपी ने एकनाथ शिंदे को 'ऑपरेशन टाइगर' का जिम्मेवारी सौंपी है, जिसके तरह ठाकरे के लोकसभा सांसदों को तोड़ने का काम करना है। पिछले दिनों उद्धव ठाकरे ने अपने 9 सांसदों की बैठक बुलाई, जिसमें 4 सांसद ही उनके घर पहुंचे, बाकी के पांच सांसद वीडियो के माध्यम से बैठक में जुड़े।
शिवसेना (UBT) ने की राहुल की तारीफ
ऐसे में शिवसेना (UBT) में टूट की चर्चाओं के बीच पार्टी सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी को लेकर कहा कि वह देश के सबसे महत्वपूर्ण, लोकप्रिय और संघर्षशील नेताओं में से एक हैं और केंद्र सरकार उनसे डरती है। संजय राउत यहीं नहीं रुके। उन्होंने राहुल गांधी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा, 'आज राहुल गांधी जनता की आवाज हैं और विपक्ष उन्हें देश के प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है।
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पश्चिम बंगाल में ममता भी राहुल भरोसे
तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हार चुकी है। 15 साल शासन करने के बाद ममता बनर्जी अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रही हैं। उनकी पार्टी टीएमसी टूट चुकी है। पार्टी के जीते 80 में से 60 विधायक उनसे बगावत करके टीएमसी पर दावा कर रहे हैं। साथ ही बागी गुट बीजेपी के साथ जाने की बात कह रहा है। ममता की मुश्किलें यही नहीं रुकी हैं। टीएमसी के 29 में से 20 लोकसभा सांसद भी NCPI में शामिल होकर ममता बनर्जी से बगावत और बीजेपी के साथ जाने का एलान कर चुके हैं।
केंद्रीय एजेंसियों से लेकर बंगाल की बीजेपी सरकार उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को आए दिन पुछताछ के लिए बुला रही हैं। उनके घर को लेकर नोटिस भेजा जा रहा है। कुल मिलाकर ममता बनर्जी की मुश्किलें आने वाले समय में घटने की बजाय बढ़ सकती हैं। ऐसे में वह दिल्ली आकर राहुल गांधी से मिलकर सियासी मदद मांग रही हैं। साथ ही ममता ने पहली बार खुलकर इंडिया गठंबधन में शामिल हुई हैं।
शरद पवार की पार्टी का कांग्रेस में विलय?
इसी बीच शरद पवार की एनसीपी (SP) भी कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ में संभावनाएं तलाश रही है। शरद पवार के भतीजे और एनसीपी नेता रोहित पवार ने कांग्रेस में पार्टी के विलय के बारे में कहा है कि विलय सही समय पर जरूर मुमकिन हो सकता है। दरअसल, क्षेत्रीय पार्टियां लगातार चुनाव हारने और बगावत-टूट की वजह से कमजोर हो रही हैं। इन घटनाक्रमों में पीछे से बीजेपी का हाथ होने के आरोप लगे हैं। इसी का फायदा उठाकर बीजेपी विपक्षी पार्टियों में फूट डालकर संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है।
विपक्षी पार्टियों में टूट के बाद खासतौर से टीएमसी और पवार की एनसीपी की कांग्रेस में विलय की भी खबरें सामने आई हैं। हालांकि, इसको लेकर अभी तक किसी बड़े नेता ने बयान नहीं दिया है, लेकिन बड़े नेताओं ने जरूर राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार किया है।