सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओपी राजभर ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला करते हुए कहा है कि ये दोनों पार्टियां असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमानों का असली नेता स्वीकार करने से पूरी तरह डरती हैं। राजभर का कहना है कि ये पार्टियां जानबूझकर ओवैसी को मुस्लिम नेता के तौर पर पहचान नहीं दे रही हैं क्योंकि उन्हें अपना बना-बनाया वोट बैंक छिन जाने का डर सता रहा है।
ओपी राजभर का साफ कहना है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी किसी भी हाल में यह नहीं चाहतीं कि मुस्लिम समुदाय के बीच असदुद्दीन ओवैसी जैसा कोई और मजबूत, स्वतंत्र और असरदार नेतृत्व उभरकर सामने आए। राजभर का मानना है, 'ये दोनों पार्टियां मुस्लिम समाज को सिर्फ एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल करती आई हैं। उन्हें इस बात का गहरा डर है कि अगर मुस्लिम समुदाय का कोई अपना स्वतंत्र नेता आगे बढ़ता है तो वे लोग अब कांग्रेस और सपा के मोहताज नहीं रहेंगे और उनका यह वोट बैंक उनसे पूरी तरह छिन जाएगा।'
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'दोनों पार्टियों की मिलीभगत'
राजभर ने यह आरोप भी लगाया है, 'जब भी मुस्लिम समाज के हितों की बात आती है या फिर किसी नए राजनीतिक विकल्प के उभरने की चर्चा होती है तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी लड़ाई को किनारे रखकर आपस में एक हो जाती हैं। उनका एकमात्र मकसद यह होता है कि मुस्लिम समाज का नेतृत्व उनके हाथों से बाहर न जाए। राजभर यह भी कहना रहा कि ये पार्टियां मुस्लिम समाज को आगे बढ़ने देने के बजाय उसे अपने राजनीतिक नियंत्रण में रखने की कोशिश करती हैं।'
ओपी राजभर के मुताबिक, असदुद्दीन ओवैसी की दिन-प्रतिदिन बढ़ती लोकप्रियता ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की नींद उड़ा दी है। राजभर ने कहा, ' ये पार्टियां ओवैसी को अपने लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती मान रही हैं यही कारण है कि वे उन्हें मुस्लिम नेता के रूप में मान्यता देने से साफ मना कर रही हैं।'
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राजभर का दावा है कि इन पार्टियों की घबराहट का मुख्य कारण यह है कि वे ओवैसी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े खतरे के रूप में देख रही हैं जिसे वे किसी भी कीमत पर बढ़ने से रोकना चाहती हैं। राजभर का मानना है कि ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अब उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ा और मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है।