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CE0-MD नोएडा हटे, JE पर गाज, इंजीनियर की मौत के बाद क्या कार्रवाई हुई?

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद अब प्रशासनिक गाज अधिकारियों पर गिरी है। नोएडा के CEO और मेट्रो कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्ट को हटा दिया गया है। पढ़िए रिपोर्ट।

Noida Death Case

युवराज मेहता। Photo Credit: PTI/SocialMedia

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नोएडा में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से हुई मौत के बाद अब सरकार जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एम लोकेश को हटा दिया गया है। नोएडा अथॉरिटी ने ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं भी रद्द कर दी हैं। युवराज मेहता की मौत को लेकर सरकार और नोएडा प्रशासन पर लगातार सवाल उठ रहे थे। 

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में 20 फुट से ज्यादा गहरे पानी से भरे गड्ढे में युवराज मेहता की कार गिर गई थी, जिसमें उनकी मौत हो गई। इस केस में अब तक एक अधिकारी की सेवा समाप्त कर दी गई जबकि दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में घने कोहरे की वजह से एक कार, अनियंत्रित होकर 20 फुट से अधिक गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी। हादसे में युवराज की जान चली गई थी। दुर्घटनाग्रस्त स्थल पर लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया है।

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क्या-क्या कार्रवाई हुई है?

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेटर नोएडा पुलिस ने कहा है कि इस घटना के संबंध में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान युवराज मेहता के तौर में हुई है। वह सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे।

युवराज, गुरुग्राम की एक टेक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। शनिवार तड़के काम से घर लौटने के दौरान यह हदसा हुआ है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. लोकेश एम ने रविवार को इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सड़क पर ब्लिंकर और इंडिकेटर नहीं लगे होने की शिकायत पर ट्रैफिक प्रकोष्ठ के सीनियर मैनेजर और मैनेजर को कारण बताओ नोटिस भेजा था। अब उन्हीं पर गाज गिर गई है।

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सेक्टर 150 से जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि अब निर्माण स्थल पर सुरक्षा की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र की परियोजनाओं का निरीक्षण करने और सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं।

कैसे हुआ था हादसा?

सेक्टर 150 के पास निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए एक गड्ढा खोदा गया था। इसी गड्ढे में एक कार के गिर जाने की सूचना पुलिस को देर रात करीब 12 बजे मिली। पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया, रेस्क्टू टीम और SDRF के जवान मौके पर पहुंचे लेकिन सॉफ्टवेयर इंजीनियर को बचाया नहीं जा सका। लाश शनिवार सुबह बरामद की गई। 

आरोप क्या लग रहे हैं?

घटनास्थल पर मौजूद एक डिलीवरी एजेंट मोनिंदर का कहना है कि बचाव अभियान में ही देरी हुई। अगर सही वक्त पर कार्रवाई की जाती तो इंजीनियर की जान बचाई जा सकती थी। मोहिंदर ने दावा किया था कि वह रात करीब पौने दो बजे घटनास्थल पर पहुंचा था और ठंड और लोहे की छड़ों की मौजूदगी की वजह से बचाव कर्मी पानी में उतरने से हिचकिचा रहे थे।

 

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मोनिंदर, प्रत्यक्षदर्शी:-
मैंने अपनी कमर में रस्सी बांधी और खुद पानी में उतर गया। मैंने करीब 30 मिनट तक युवक और उसकी कार को ढूंढा। मुझे बाद में बताया गया कि अगर मदद 10 मिनट पहले पहुंच जाती तो उसे बचाया जा सकता था।

पुलिस क्या कह रही है?

एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) राजीव नारायण मिश्र ने कहा, 'पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने युवक को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। दमकल विभाग की क्रेन, सीढ़ी, अस्थायी नाव और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उस समय कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। पीड़ित परिवार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।'

मृतक के पिता ने अपनी शिकायत में क्या कहा है?

सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने कहा है कि घटना के संबंध में शिकायत के आधार पर दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पिता राज कुमार मेहता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि यहां रहने वाले लोगों ने नाले के पास इंडीकेटर लगाने की अपील थी, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया। यहां बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं। 

मृतक के लिए कैंडल मार्च

रविवार शाम को स्थानीय लोगों ने युवराज मेहता के लिए न्याय की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला था। लोगों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ है।

 

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