भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि को लेकर उसका रुख पहले से अधिक सख्त हो चुका है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है ताकि भविष्य में सिंधु नदी प्रणाली का पानी पाकिस्तान तक न पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में पाटिल ने कहा कि सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित है और सरकार की कोशिश है कि पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी न मिले। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिलेगी।
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भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों और संबंधों की समीक्षा शुरू की थी। सिंधु जल संधि पर लिया गया फैसला भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी और उसकी पांच सहायक नदियों के जल बंटवारे की व्यवस्था तय की गई थी। समझौते के अनुसार रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का उपयोग भारत के लिए निर्धारित किया गया, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान को आवंटित किया गया।
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POK मुद्दे पर भी पाकिस्तान को घेरा
इस बीच भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी पाकिस्तान की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने के लिए फर्जी खबरों और वीडियो का सहारा ले रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को उसके कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील भी की।