अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे में चोरी के मामले को 10 दिन से ज्यादा समय बीत गया है लेकिन योगी सरकार ने अभी तक FIR नहीं दर्ज की है। विपक्ष योगी सरकार और बीजेपी के ऊपर आरोप भी लगा रही है कि एफआईआर ना दर्ज करके दोषियों को बचाया जा रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक याचिका दायर करके राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही इस मामले में निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच का अनुरोध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका को दो वकीलों ने दायर किया है। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि सीबीआई की अगुवाई वाले विशेष जांच दल (SIT) को 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के कामकाज और प्रशासन से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और अन्य गैर-कानूनी कामों की जांच करनी चाहिए।
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निर्देश देने का अनुरोध
याचिका में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और न्यास को ऐसी नियामक, पर्यवेक्षी और लेखा-परीक्षण प्रणाली बनाने और उन्हें लागू करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया, जो जनहित की रक्षा करने और करोड़ों श्रद्धालुओं और दानदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी हों।
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका दायर करने वाले दोनों वकीलों के नाम अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव हैं। उन्होंने याचिका में कहा, 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी रकम गायब होने और दूसरी कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट सच साबित हों या न हों, लेकिन ऐसी रिपोर्ट ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या की शान को फिर से बहाल करने के लिए संघर्ष किया था।'
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जनता का भरोसा बढ़ाने पर जोर दिया जाए
याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी ने बिना FIR या किसी नियमित आपराधिक मामले के इस मामले की जांच शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया है कि न्यास की गायब राशि और दूसरी कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट की सच्चाई की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए। यह जांच एक ऐसी एजेंसी करे जिसके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक जांच को संभालने के लिए जरूरी विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत तंत्र हों।
याचिका में कहा गया है, 'ऐसी जांच से जनता का भरोसा ज्यादा बढ़ेगा, बजाय इसके कि प्रशासनिक अधिकारियों वाला विशेष जांच दल शुरुआती जांच करे, जिनके पास आपराधिक जांच में खास योग्यता नहीं हो सकती है।