logo

ट्रेंडिंग:

आज सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगी CM ममता बनर्जी? रोकने के लिए अर्जी दाखिल

पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन मामले में मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के व्‍यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश होने को चुनौती दी गई है।

mamata banarjee supreme court

ममता बनर्जी। Photo Credit- PTI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले को लेकर सोमवार (9 फरवरी, 2026) को सुनवाई होनी है। पिछले हफ्ते सीएम ममता बनर्जी खुद कोर्ट में पेश हुई थीं और उन्होंने पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपनी अर्जी में अपनी बातें रखी थीं। मगर, शीर्ष कोर्ट में आज की सुनवाई से पहले मामले में मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के व्‍यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश होने को चुनौती दी गई है। बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति को चुनौती देते हुए एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया है।  

 

यह अर्जी अखिल भारत हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दाखिल की है। ⁠मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है। अर्जी में कहा गया है कि अनुच्छेद 32 के तहत दायर कार्यवाही में किसी वर्तमान मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पेश होना संवैधानिक रूप से अनुचित, संस्थागत रूप से अवांछनीय और कानूनी रूप से अस्थिर है।

 

यह भी पढ़ें: 'BJP के अच्छे दिन हमसे हैं,' संघ के 100 पूरे होने पर बोले मोहन भागवत

अनुच्छेद 32 का दिया हवाला

याचिका में कहा गया है, 'मौजूदा अर्जी खास तौर पर इस कोर्ट की मदद करने के लिए एक गंभीर संवैधानिक और संस्थागत महत्व के मुद्दे पर दायर की गई है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट की कार्यवाही में एक मौजूदा मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत पेशी की इजाजत देने की अनुचित, संस्थागत रूप से अवांछनीय और कानूनी रूप से अस्थिर है।'

 

यह भी पढ़ें: भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं? पीयूष गोयल ने 'भारत के हित' में दिया जवाब

क्यों दावा नहीं कर सकतीं ममता?

याचिकाकर्ता के मुताबिक, 'एसआईआर से जुड़े मुद्दों को उठाने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार, संवैधानिक शक्तियों और चुनाव आयोग से संबंधित है, इसलिए मुख्यमंत्री व्यक्तिगत क्षमता में पेश होने का दावा नहीं कर सकतीं हैं।'

 

आवेदन में आगे कहा गया है कि राज्य पहले से ही नियुक्त वरिष्ठ वकीलों के जरिए प्रतिनिधित्व कर रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति न्यायिक परंपराओं और स्थापित प्रथा के विपरीत है। उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे मामलों को वकीलों के जरिए आगे बढ़ाएं, ताकि संवैधानिक अदालतों की गरिमा, निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनी रहे।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap