प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर की शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया। यात्रा की शुरुआत शंख सर्कल से हुई और वीर हमीरजी गोहिल सर्कल पर खत्म हुई। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सभ्यता हमें विनाश करने का अहंकार नहीं देती है। जो सभ्यता मिटाकर आगे बढ़ना चाहती हैं। वह स्वयं समय के साथ खत्म हो जाती हैं। उन्होंने मंदिर के इतिहास का भी उल्लेख किया।
पीएम मोदी ने कहा, 'सोमनाथ महादेव मंदिर में ध्वजारोहण भारत की शक्ति और क्षमताओं को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। गजनी से औरंगजब तक, सभी धार्मिक कट्टरपंथियों ने सोचा कि उन्होंने अपनी तलवार के बल पर सोमनाथ पर विजय हासिल कर ली है। समय के चक्र में वे कट्टरपंथी आक्रमणकारी अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है।'
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पीएम मोदी ने आगे कहा, 'तुष्टिकरण के ठेकेदारों ने हमेशा कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेके। जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई। उस समय सौराष्ट्र के सर्वाधिक मशहूर हमारे महाराज दिग्विजय सिंह जी आगे आए थे। भूमि अधिग्रहण से सुरक्षा व्यवस्था तक उन्होंने राष्ट्रीय गौरव को सबसे ऊपर रखा था। उस दौरान सोमनाथ मंदिर के लिए जाम साहब ने एक लाख रुपये का दान दिया था। उन्होंने ट्रस्ट के प्रथम अध्यक्ष के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी निभाई थी।'
'दूसरों को मिटाने वाली सभ्यताएं खत्म हो जाती है'
पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में मौजूदा वैश्विक व्यवस्था का भी जिक्र किया और कहा, 'हमारी सभ्यता का संदेश कभी किसी को पराजित करने का नहीं रहा, बल्कि जीवन को संतुलन में रखने का रहा है। हमारे यहां आस्था की राह हमें घृणा की ओर नहीं ले जाती है। हमारे यहां शक्ति हमें विनाश करने का अहंकार नहीं देती। सोमनाथ जैसे तीर्थ ने हमें सिखाया है कि सृजन का मार्ग लंबा होता है, वही स्थायी और चिरंजीव होता है। तलवार की नोक पर कभी दिलों को नहीं जीता जा सकता है, जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना चाहती हैं। वह स्वयं समय में खो जाती है। इसलिए भारत ने दुनिया को यह नहीं सिखाया कि दूसरी को हराकर कैसे जीता जाए, बल्कि यह सिखाया कि कैसे दिलों को जीतकर जिया जाए। यह विचार आज दुनिया की जरूरत है। सोमनाथ की 1000 वर्षों की गाथा पूरे मानवता को यह सीख दे रही है।'
हमें अधिक सावधान रहना होगा: पीएम मोदी
पीएम ने कहा, 'दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वो ताकतें मौजूद हैं, पूरी तरह से सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध किया। आज तलवारें की आज तलवारों की जगह, अन्य कुत्सित तरीकों से भारत के खिलाफ षड़यंत्र रचे जा रहे हैं, इसलिए हमें और अधिक सावधान रहना है। हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है, हमें एकजुट रहना है। ऐसी हर ताकतों को हराना है, जो हमें बांटने की साजिश रच रही है।'
पीएम मोदी ने तर्क दिया कि जब हम अपनी आस्था और जड़ों से जुड़े रहते हैं। पूरे स्वाभिमान के साथ अपनी विरासत का संरक्षण करते हैं तो हमारी सभ्यता की जड़े भी मजबूत होती हैं। इसलिए पिछले 1000 वर्षों की यात्रा हमें अगले 1000 वर्षों के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देती है।
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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाटन क्षेत्र के धार्मिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'प्रभास पाटन का क्षेत्र भगवान शिव का अपना क्षेत्र तो है। इसकी पवित्रता भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ी है। महाभारत काल में पांडवों ने भी इस तीर्थ में तपस्या की थी। इसलिए यह भारत के अनगिनत आयमों को नमन करने का भी अवसर है।
पीएम मोदी ने बताया कि यह भी एक सुखद संयोग है कि आज जब सोमनाथ मंदिर के स्वाभिमान यात्रा के 1000 साल पूरे हो रहे हैं तो साथ ही 1951 हुए इसके पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। मैं दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुभकामना देता हूं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व एक 1,000 साल पहले हुए विध्वंस के स्मरण के लिए ही नहीं है। ये पर्व हजार साल की यात्रा का पर्व है। साथ ही, ये हमारे भारत के अस्तित्व और अभिमान का पर्व भी है। हमें हर कदम और हर मुकाम पर सोमनाथ और भारत में अनोखी समानताएं दिखती हैं।'