'जीवेत शरदः शतं...', आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर पीएम मोदी ने लिखा भावुक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी को उनके 99वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए लेख लिखा है। उन्होंने 'जीवेत शरदः शतम्' का उल्लेख करते हुए आडवाणी के राजनीतिक सफर और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और लाल कृष्ण आडवाणी, फोटो क्रेडिट- पीएम मोदी, सोशल मीडिया
आज यानी 8 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी अपना 99वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और उनके राजनीतिक सफर को याद करते हुए एक लेख लिखा। पीएम मोदी ने कहा कि यह कितना सुखद संयोग है कि आज ही दीपावली का पावन पर्व है और आज ही लालकृष्ण आडवाणी अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें हमेशा आडवाणी का स्नेह, सान्निध्य और मार्गदर्शन मिलता रहा है। पीएम मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के देश के प्रति योगदान, जनसंघ को मजबूत करने और भारतीय जनता पार्टी को खड़ा करने में उनकी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने पार्टी को 'नेशन फर्स्ट' यानी राष्ट्र प्रथम की स्पष्ट सोच दी और कई पीढ़ियों के कार्यकर्ताओं को तैयार किया।
पीएम मोदी ने आडवाणी के लिए सौ साल तक स्वस्थ और लंबा जीवन जीने की कामना की। उन्होंने प्रार्थना करते हुए लिखा कि आडवाणी लंबे समय तक स्वस्थ रहें, दुनिया को देखते रहें और जीवन की खुशियों को महसूस करते रहें। पीएम मोदी ने लिखा, 'आज इस अवसर पर श्रद्धेय आडवाणी जी के लिए मन में एक ही भाव उमड़ रहा है... जीवेत शरदः शतं, पश्येम शरदः शतं, शृणुयाम शरदः शतम्।' इस संस्कृत पंक्ति के जरिए उन्होंने आडवाणी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। पीएम मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के जीवन के कई पहलुओं को याद किया। उन्होंने भारत के विभाजन के दौरान सिंध छोड़ने से लेकर जनसंघ को मजबूत करने, आपातकाल के खिलाफ संघर्ष और सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा का नेतृत्व करने तक के उनके सफर का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने आडवाणी को एक अच्छा पाठक, लेखक और सिनेमा का शौकीन भी बताया।
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'बिना कड़वाहट के शुरू किया जीवन'
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। 1947 में भारत के विभाजन के दौरान उन्हें अपना घर छोड़कर भारत आना पड़ा। पीएम मोदी ने लिखा कि आडवाणी ने बिना किसी कड़वाहट के नए सिरे से अपना जीवन शुरू किया। इसके बाद उन्होंने जनसंघ को मजबूत करने और भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। पीएम मोदी ने कहा कि आडवाणी ने पार्टी को राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने अपना संगठन मजबूत किया और कई कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका मिला। प्रधानमंत्री ने याद किया कि 1996 में भाजपा पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
'आडवाणी जी का जन्म 8 नवंबर, 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था। 1947 में, जब वे युवा थे, तब उन्हें विभाजन की पीड़ा सहनी पड़ी। सिंध में अपना घर, अपना परिवेश, अपनी जानी-पहचानी दुनिया छोड़कर उन्हें आना पड़ा। सब कुछ पीछे छूट गया और जीवन की नई शुरुआत शून्य से करनी पड़ी। लेकिन इस कठिन अनुभव को लेकर उनके मन में कभी कोई कड़वाहट या पछतावा नहीं रहा।'- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
'अटल-आडवाणी 6 दशक तक रहे सहयोगी'
पीएम मोदी ने आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई दशकों तक साथ काम किया और कभी एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना। मोदी के मुताबिक, दोनों नेताओं ने मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में भूमिका निभाई। आडवाणी 1967 में दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के अध्यक्ष बने थे। 1970 में उन्होंने संसद में प्रवेश किया। इसके बाद वे लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। पीएम मोदी ने उनके संसदीय अनुभव और संसद में दिए गए योगदान को याद किया।
पीएम मोदी ने लिखा, 'राजनीति के इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं, जब दो बड़े कद के नेता इतने लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हों। अक्सर समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलती हैं, महत्वाकांक्षाएं टकराती हैं और साथ चलने वाले नेता भी अलग-अलग रास्तों पर निकल जाते हैं। लेकिन अटल जी और आडवाणी जी का साथ अपने आप में एक अनूठी मिसाल है। इतिहास साक्षी है, पांच-छह दशकों की इस लंबी यात्रा में दोनों एक-दूसरे के सहयोगी बने रहे। एक-दूसरे के प्रति उनका विश्वास और सम्मान हमेशा बना रहा। अटल जी के जीवन के अंतिम समय तक यह साथ कायम रहा।'
आपातकाल के खिलाफ संघर्ष-राम रथयात्रा का किया नेतृत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को आडवाणी के जीवन का अहम मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया और इस दौरान जेल भी गए। आडवाणी ने अपनी किताब 'ए प्रिजनर्स स्क्रैप-बुक' में आपातकाल के अनुभवों को दर्ज किया है।
पीएम मोदी ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई राम रथयात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण घटना बताया। मोदी ने कहा कि उन्हें इस यात्रा की योजना बनाने से लेकर उसे पूरा करने तक जुड़े रहने का मौका मिला था। उन्होंने यात्रा के दौरान आडवाणी की मेहनत और लंबे सफर के बावजूद उनकी सक्रियता की तारीफ की।
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गृह मंत्री- उपप्रधानमंत्री के तौर पर भी निभाई जिम्मेदारी
संघर्ष के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने केंद्र सरकार में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वे सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री का पद संभाला। पीएम मोदी ने कहा कि आडवाणी ने गृह मंत्री रहते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ उनके सख्त रुख और सुरक्षा बलों के हित में किए गए कामों का भी जिक्र किया।
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किताबों और फिल्मों के भी शौकीन रहे आडवाणी
प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के राजनीतिक जीवन के अलावा उनकी व्यक्तिगत रुचियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आडवाणी किताबें पढ़ने के शौकीन हैं और नियमित रूप से अखबार पढ़ते हैं। उन्हें सिनेमा और थिएटर में भी काफी दिलचस्पी रही है। वे फिल्मों की समीक्षा भी करते रहे हैं। पीएम मोदी ने उनकी आत्मकथा 'माई कंट्री, माई लाइफ' का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें उनके इतिहास के प्रति लगाव की झलक मिलती है। उन्होंने सिंधी संस्कृति को बढ़ावा देने और लेह के पास सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने में आडवाणी के योगदान को भी याद किया।
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