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आउटसोर्सिंग नौकरियों पर रेलवे मेन्स यूनियन का हल्ला बोल, क्या मांग रहे हैं?

रेलवे में ठेके पर रखे जा रहे कर्माचारियों और पक्की नौकरियों में हो रही देरी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इसके साथ ही रेल कर्मियों के कल्याण को लेकर भी मांग तेज हो रही है।

Railway Men Union attacks Ministry over outsourcing of jobs

रेलवे मेंस यूनियन की बैठक। Photo Credit- Facebook

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भारतीय रेलवे इस समय महंगे और बड़े प्रोजेक्ट्स में जमकर पैसा लगा रही है। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर सालों से काम चल देश के हर कोने से रेलवे वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों का संचालन करवा रहा है लेकिन इन सबके बीच भारतीय रेलवे के कुछ बुनियादी सवाल पीछे छूट रहे हैं। दरअसल, रेलवे बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्तियां कर रहा है। इससे युवाओं के साथ में रेलवे मेन्स यूनियन में भारी नाराजगी है। रेलवे में लाखों की तादाद में खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्ती करने की भी लंबे समय से मांग की जा रही है।

 

देश के कई हिस्सों में लाखों युवा रेलवे की सरकारी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी बेरोजगारी खत्म हो सके। इसी कड़ी में पिछले दिनों ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) और उत्तर रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) ने भी आवाज उठाई है। 8 अक्टूबर को दिल्ली के करनैल सिंह रेलवे स्टेडियम में AIRF ने आउटसोर्सिंग के खिलाफ राष्ट्रीय अभिवेशन बुलाया था। इस मौके पर रेलवे के अलग-अलग जोन और मंडलों से बड़े पैमाने पर लोग जुटे। 

 

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मामला आउटसोर्सिंग से आगे का

इस समय भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग का मुद्दा सिर्फ ठेका कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में रेलवे के नियमित कर्मचारियों की भर्ती, तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कामों की जिम्मेदारी, स्थायी रोजगार और रेल परिचालन की जवाबदेही जैसे सवाल हैं। यूनियनें रेलवे के आधुनिकीकरण का विरोध करने के बजाय यह मांग कर रही हैं कि महत्वपूर्ण तकनीकी और सुरक्षा संबंधी काम प्रशिक्षित रेलवे कर्मचारियों से कराए जाएं।

 

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यूनियनें रेलवे से मांग क्या कर रही हैं?

  • आउटसोर्सिग बंद करने की मांग।
  • 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट जल्द से जल्द जारी करने की मांग।
  • कैडररिस्ट्रक्चरिंग को बिना देरी किए लागू किया जाए।
  • रेलवे में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।
  • नए कामों के लिए नए पदों का सृजन किया जाए।
  • सभी कर्मचारियों के लिए काम के लिए घंटे तय किए जाएं।
  • महिला रेल कर्मियों की छुट्टियों में उदारीकरण करने की मांग।
  • रेल कर्मचारियों के लिए लार्जेस ओजना लागू की जाए।
  • उम्मीद कार्ड दिखाकर मान्याता प्राप्त अस्पतालों में सीधे ईलाज किया जाए।
  • विभिन्न संरक्षा कोटियों में काम कर रहे कर्मचारियों को रिस्क एवं हार्ड ड्यूटी भत्ता दिया जाए।
  • सभी बड़े स्टेशनों पर कर्मचारियों को आराम करने के लिए विश्राम स्थल की सुविधा दी जाए।
  • रेलवे क्वार्टर्स की दुर्दशा को ठीक करवाते हुए नए आवासों का निर्माण करवाया जाए।

उत्तर रेलवे ने इन 12 मांगों के साथ में रेलवे से जल्द से जल्द लागू करने की मांग कर रही है। ऐसे में देखना होगा कि भारतीय रेलवे देश के लाखों बेरोजगार युवाओं और खुल के रेल कर्मियों के लिए क्या करता है?


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