ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद देश में बैंक से कर्ज लेने की रफ्तार तेज हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 के अंत तक बैंकों के कुल गैर-खाद्य कर्ज यानी सरकारी खाद्य खरीद के लिए दिए जाने वाले कर्ज को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों को दिए गए कर्ज में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 19.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल यह बढ़त 11.2 प्रतिशत थी। इसमें सर्विस सेक्टर, कृषि और उससे जुड़े काम, उद्योग और व्यक्तिगत कर्ज यानी पर्सनल लोन शामिल है।
खास बात यह है कि कर्ज लेने के मामले में सर्विस सेक्टर सबसे आगे रहा। इस सेक्टर में बैंक कर्ज की सालाना बढ़ोतरी 28.3 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह महज 9.9 प्रतिशत थी। आइए आंकड़ों से समझते हैं भारत में कर्ज लेने की रफ्तार कितनी बढ़ी, कौन ले रहा सबसे ज्यादा कर्ज।
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किस सेक्टर ने कितना कर्ज लिया?
सितंबर 2026 में बैंकों ने अलग-अलग क्षेत्रों को कितना कर्ज दिया, यह जानकारी देश के 41 बड़े बैंकों शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक (SCBs) से ली गई है। देश भर के बैंक जितना नॉन फूड क्रेडिट यानी गैर-खाद्य कर्ज देते हैं, उसका करीब 95 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं बैंकों के पास है।
- कृषि और उससे जुड़े काम: इस क्षेत्र में बैंक कर्ज सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले साल इसी अवधि में यह बढ़ोतरी 8.9 प्रतिशत थी।
- उद्योग: उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज में 19.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले साल यह 7.7 प्रतिशत थी। बड़े और मझोले उद्योगों को मिलने वाले कर्ज की रफ्तार बढ़ी, जबकि छोटे और सूक्ष्म उद्योगों में कर्ज की वृद्धि स्थिर रही।
- सर्विस सेक्टर: इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा 28.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल यह आंकड़ा 9.9 प्रतिशत था। इसमें NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां), बिजनेस, कमर्शियल रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और प्रोफेशनल सर्विसेज को दिए जाने वाले कर्ज की अहम भूमिका रही।
- पर्सनल लोन: आम लोगों को दिए जाने वाले पर्सनल लोन में 17.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले साल यह 11.5 प्रतिशतथी। होम और वाहन लोन में कर्ज की मांग मजबूत रही। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बदले मिलने वाले कर्ज में तेजी आई। वहीं, सोने के गहनों और एजुकेशन लोन के बदले मिलने वाले कर्ज की बढ़ोतरी दर पिछले साल के मुकाबले धीमी रही, हालांकि यह अब भी मजबूत बनी हुई है।

आम लोगों के कर्ज का हाल जानिए
पर्सनल लोन में सितंबर 2026 के दौरान 17.3 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 11.5 प्रतिशत थी। इसमें होम लोन की मांग मजबूत बनी रही। गाड़ियों के लिए लोन में भी अच्छी वृद्धि रही। इसके अलावा, फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले मिलने वाले कर्ज में तेजी आई। वहीं सोने के बदले मिलने वाले कर्ज और एजुकेशन लोन की वृद्धि पिछले साल के मुकाबले धीमी हुई।
उद्योगों में किन क्षेत्रों को मिला ज्यादा कर्ज?
RBI के मुताबिक, उद्योगों में इंफ्रास्ट्रक्चर, बेसिक मेटल और मेटल प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग, केमिकल, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को दिए जाने वाले कर्ज में अच्छी सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
ब्याज दरों के बीच कर्ज की मांग क्यों अहम है?
अब बात ब्याज दरों की भी कर लेते हैं, RBI की मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया था। बता दें कि रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसका असर बैंकों की कर्ज दरों पर पड़ सकता है, हालांकि हर तरह के लोन की ब्याज दर एक जैसी नहीं होती है।