दिल्ली के जंतर मंतर पर सवर्णों का 'रिजर्वशन हटाओ आंदोलन' अपने चौथे दिन में पहुंच गया है। यह आंदोलन पहले दिन से ही बिखर गया। आंदोलन का चेहरा कौन है, इसे लेकर भ्रम की स्थिति है। एक तरफ हर्ष दुबे, सर्वेश पांडेय, राज शेखावत, शीला गोगामेड़ी और महिपाल सिंह मकाराना जैसे नाम सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इनमें से हर नेता खुद को आंदोलन का चेहरा बता रहा है। दूसरी तरफ वेदांश, अजीत भारती, अनुराधा तिवारी और नेहा दास जैसे नाम हैं।
आरक्षण हटाओ आंदोलन, दूसरे दिन से ही बिखरा-बिखरा है। आंदोलन के दूसरे दिन 22 अगस्त को ही हर्ष दुबे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से जा मिले। ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि मांगों पर विचार किया जा रहा है, बातें मान ली जाएंगी, शीर्ष नेतृत्व को बता दिया जाएगा। हश्र यह हुआ कि संदेश गया कि आरक्षण हटाओ आंदोलन अब खत्म है। मुलाकात के अगले दिन 23 अगस्त को भी जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे।
यह भी पढ़ें: आंबेडकर, SC/ST से लेकर चंद्रशेखर तक, किन बयानों पर घिरे अजीत भारती, FIR क्यों?
कौन चला रहा है आरक्षण हटाओ आंदोलन?
- पहला गुट: राज शेखावत, शीला गोगामेड़ी और महिपाल सिंह मकाराना कहां हैं, इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। कुछ लोगों ने हिरासत में होने का दावा किया, कुछ लोगों ने चुप्पी साधी। जिस तरह से आंदोलन से पहले इनके बयान मीडिया में सामने आ रहे थे, वैसे नहीं आ रहे हैं। राज शेखावत का रोते हुए एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह अपने साथियों के लिए जान देने की बात कह रहे हैं।
- दूसरा गुट: 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' की अगुवाई अजीत भारती का गुट कर रहा है। अजीत भारती के साथ वेदांश, अजीत भारती, अनुराधा तिवारी और नेहा दास हैं। अजीत भारती का कहना है कि रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन जारी रहेगा, आंदोलन के विषय में जो भी फैसला होगा, जो आधिकारिक बात होगी, इन्हीं के जरिए आएगी, किसी और की बात पर यकीन न करें।
- तीसरा गुट: आदित्य सिंह, अनिल पांडेय, सर्वेश पांडेय। ये लोग किसी संगठन से नहीं हैं। आदित्य सिंह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, भाषण देते हैं, कभी बीजेपी के लिए बोलते थे, कभी जनसुराज के पीछे गए और अब आरक्षण हटाने की मांग कर रहे हैं। ग्वालियर के विवादित वकील अनिल मिश्रा भी आंदोलन के सक्रिय नाम हैं, वह खूब बयान दे रहे हैं। सर्वेश पांडेय सवर्ण आर्मी नाम के एक संगठन के मुखिया हैं। आरक्षण के खिलाफ बोलते रहे हैं।
यह भी पढ़ें: देश से जाति आधारित आरक्षण हटाना मुश्किल क्यों है? एक-एक बात समझिए
क्यों आंदोलन के भटकने पर उठे सवाल?
राज शेखावत, अध्यक्ष, करणी सेना:-
चलो जंतर मंतर। पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किया हुआ है किन्तु आज ही बहुत जल्द जंतर मंतर पहुंचूंगा। हम सभी अनिश्चित काल के लिए डटे रहेंगे और UGC रोलबैक करवाएंगे। अफवाहों से बचें। सभी पहुंचे एवं डटे रहें।
अजीत भारती ने कहा है कि किस गति से चल रहे हैं ये लोग पहुंच ही नहीं रहे हैं। आंदोलन के दूसरे नेता भी पहुंच नहीं रहे हैं। दूसरी तरफ शीला गोगामेड़ी को जान से मारने की धमकी मिली है, अभी वह कहां हैं, यह पता नहीं है। महीपाल सिंह मकराना हरियाणा में हैं और जाट सिखों का समर्थन मांग रहे हैं। वह 8-9 दिनों से हरियाणा में मार्च निकाल रहे हैं और 'UGC रोलबैक' आंदोलन कर रहे हैं।
असली बनाम नकली की जंग क्यों मची है?
आंदोलन को लेकर असली और नकली की जंग भी शुरू हुई है। कुछ लोग सिर्फ विश्वविद्याल अनुदान आयोग (UGC) नियमावली को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उस पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट स्टे लगा चुका है। कुछ लोग आरक्षण हटाने की मांग कर रहे हैं लेकिन मांग क्या है, यह स्पष्ट ही नहीं है। अजीत भारती गुट ने अपनी साफ मांगें रखी हैं, उन्होंने बिंदुवार बताया है कि क्या-क्या चाहिए, सरकार से क्या मांग है और वे किस तरह की कवायद चाहते हैं। हर गुट, दूसरे गुट को नकली बता रहा है। आदित्य राज और सर्वेश पांडेय स्वतंत्र तौर पर हिस्सा ले रहे हैं, अजीत भारती भी उन्हें लेकर सवाल नहीं उठा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: जंतर मंतर पर 'आरक्षण हटाओ' आंदोलन, हजारों लोग उमड़े, कई हिरासत में
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन की मांग क्या है?
- आरक्षण देते समय आर्थिक स्थिति को ज्यादा महत्व दिया जाए
- गरीब व्यक्ति को जाति चाहे जो भी आरक्षण का लाभ मिले
- आरक्षित वर्गों के अंदर भी कोटा-इन-कोटा व्यवस्था हो
- सबसे कमजोर लोगों तक फायदा पहुंचाने की कोशिश हो
- सरकार से पिछले कई दशकों के आरक्षण के असर पर श्वेत पत्र जारी करे
- उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम अंकों का स्तर बनाए रखा जाए
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और ज्यादा सुविधाएं मिले