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आंबेडकर, SC/ST से लेकर चंद्रशेखर तक, किन बयानों पर घिरे अजीत भारती, FIR क्यों?

अजीत भारती, आरक्षण हटाओ आंदोलन के चर्चित चेहरे हैं। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद और आरक्षण को लेकर कुछ ऐसा कहा है कि उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

Ajeet Bharti

अजीत भारती। Photo Credit: AjeetBharti/X

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जंतर मंतर पर आरक्षण हटाओ आंदोलन को लेकर चर्चा में आए यू्ट्यूबर और पत्रकार अजीत भारती मुश्किलों में फंस गए हैं। अजीत भारती पर अनुसूचित जाति के अपमान का आरोप लगा है। उन पर जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल से वर्ग विशेष के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह जानबूझकर लोगों की भावना को ठेस पहुंचा रहे हैं। 

अजीत भारती से किसी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि वह अगर अपनी बहन की शादी चंद्रशेखर आजाद से करा दें तो आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। इसके जवाब में अजीत भारती ने कहा था, 'मेरी बहन की शादी हो चुकी है, वह अपने जीवन में खुश है, दो बच्चे हैं उसके।' इसके बाद चंद्रशेखर आजाद पर उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसे लिखा नहीं जा सकता है। 

यह भी पढ़ें: 'क्या पता राष्ट्रपति बनने का ऑफर मिला हो', अब हर्ष दुबे पर अजीत भारती ने कसा तंज

आंबेडकर पर क्या कहा था?

अजीत भारती ने कहा, 'आंबेडकर की पत्नी ब्राह्मण थीं। उनके समय में आरक्षण नहीं था, उनको एक राजपूत राजा और ब्राह्मण व्यक्ति ने पढ़ने के लिए विदेश भेजा। उनके पास बढ़िया दिमाग था, पढ़ने-लिखने वाले व्यक्ति थे। तुम्हारी तरह आरक्षण की भीख पर पलने वाले लोग नहीं थे। उनहोने बिना आरक्षण कई डिग्रियां ले ली।'

अजीत भारती पर क्या आरोप लगे हैं?

अजीत भारती पर आरोप हैं कि उन्होंने 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' से जुड़े एक यूट्यूब शो में नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और उनके परिवार के प्रति अभद्र, अश्लील और जातिगत रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। उन्होंने डॉ. भीम राव आंबेडकर और अनुसूचित जाति के खिलाफ जातिगत तौर पर अपमानजनक बातें कहीं हैं। उन पर आरक्षण व्यवस्था के संदर्भ में नफरत फैलाने के आरोप हैं। अजीत भारती पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के भी आरोप लगे हैं। 

Ajeet Bharti

यह भी पढ़ें: अजीत भारती के खिलाफ पंजाब में क्यों दर्ज हो गई FIR? समझिए पूरा मामला

कहां फंस गए अजीत भारती, किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस?

FIR में एससी/एसटी क्ट 1989 की धारा 3 की कई उपधाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें जातिगत अपमान, नफरत फैलाने, और अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ी धाराएं हैं। 

IT ऐक्ट 2000 की धारा 67 के तहत भी केस दर्ज हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लीलता और आपत्तिजनक सामग्री फैलने के भी चार्ज लगाए गए हैं।
 

FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1)(सी) का भी जिक्र है। यह धारा अलग-अलग समूहों के विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और नफरत बढ़ाने से संबंधित है। धारा 351(3) आपराधिक धमकी से संबंधित धारा है। 

 

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