आरक्षण हटाओ आंदोलन कई टुकड़ों में बिखर गया है। आरक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए सुधार के लिए 21 अगस्त को जंतर मंतर से इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, महज 2 दिनों में यह आंदोलन अलग-अलग गुटों में बंट गया है। हर्ष दुबे से लेकर करणी सेना तक इस आंदोलन से पीछे हट चुके हैं, जबकि ये चेहरे खुद को इस आंदोलन का अगुवा बता रहे थे। आंदोलन से जुड़े यूट्यूबर और पत्रकार अजीत भारती ने हर्ष दुबे को रुख बदलने पर जमकर खरी खोटी सुनाई है।
अजीत भारती ने तंज कसते हुए कहा कि हर्ष दुबे ने जो आंदोलन खड़ा किया है, वह वहां पर आए, भारत का सबसे बड़ा आंदोलन है। हर्ष ने कहा कि अब रिटायर होना है, जनता नतमस्तक हो गई, हर तरफ से पुष्प वर्षा हो गई, चारो तरफ जयजयकार हो गई। अजीत भारती ने हर्ष भारती को परोक्ष रूप से गद्दार कहा है।
अजीत भारती ने कहा, 'ब्रजेश पाठक ने कहा है कि आगे चलकर राष्ट्रपति बनाएंगे। अभी एज कम है आपकी। कुछ दिन इंतजार कर लो नकली सर्टिफिकेट बनवा देंगे। द्रौपदी जी से बोलेंगे अब जाइए, आपका काम हो गया। अब तो कोई ब्राह्मण ही बनेगा।'
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हर्ष दुबे से क्यों नाराज हैं आरक्षण हटाओ आंदोलन के लोग?
हर्ष दुबे आरक्षण हटाओ आंदोलन की अगुवाई कर रहे थे। वह जंतर मंतर पर थे, अचानक शनिवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जा पहुंचे। वहां उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की। पहले वह मांग कर रहे थे कि सरकारी नौकरी में सवर्णों को अवसर मिले, आर्थिक आधार पर आरक्षण की योजन लागू की जाए लेकिन अचानक सरेंडर मोड में आ गए।
ब्रजेश पाठक ने संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने भरोसा दिया कि उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा। दो दिन बाद नए सिरे से बातचीत की वादा किया। हर्ष दुबे ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय नेतृत्व उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा। ब्रजेश पाठक की बातों से लगा कि अब यह आंदोलन खत्म हो गया है। हर्ष दुबे को लोगों ने आंदोलन का गद्दार कहा। लोगों का कहना है कि वह अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए सत्तारूढ़ दल से जा मिले हैं।
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आंदोलनकारियों ने क्या कहा?
अजीत भारती, रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन:-
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन का हर्ष दुबे के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कोई समर्थन नहीं है। जो लोग हर्ष या अन्य लोगों के बुलाने पर जंतर मंतर आए थे, उनसे विनम्र निवेदन है कि वो अपने घरों को प्रस्थान करें। कोई भी पार्टी इसे यह ना समझे कि आंदोलन समाप्त हो चुका है। हम चर्चा करेंगे, लोगों को बताएंगे और हम शीघ्र ही वापस आएंगे और इस संख्या से बहुत बड़ी संख्या में आएंगे। हर्ष दुबे के पिताजी को विधायक टिकट हेतु शुभकामनाए। आपके माध्यम से एक सवर्ण विधानसभा में पहुंचेगा। आशा है आप वहां आरक्षण की वर्तमान नीतियों का विरोध करेंगे।
अब आंदोलनकारियों की नई मांगें क्या हैं?
- आरक्षण पर श्वेत-पत्र जारी करे
- EWS को SC जैसी सुविधाएं दें
- कोटा-विदिन-कोटा लागू हो
- कटऑफ में 10 फीसदी से अधिक अंतर न हो
- बौद्धिक क्षमता पर सर्वेक्षण कराया जाए
- एक व्यक्ति, एक परिवार को एक बार ही आरक्षण
- दशकीय समीक्षा व सनसेट क्लॉज बने
- पुस्तकालय आरक्षण रद्द करना
- UGC नियमों की समीक्षा हो
- सवर्ण उत्पीड़न रोकथाम कानून हो
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टुकड़ों में बिखर गया है यह आंदोलन?
अजीत भारती:-
सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
अजीत भारती ने कहा, 'सरकार हर आंदोलन को फूट, समझौता या बल-प्रयोग से समाप्त करने की कोशिश करती है। RHA के नाम पर जंतर मंतर पर लगभग 7000 लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। आंदोलन का लक्ष्य भीड़ या हिंसा नहीं, बल्कि जनमानस को वैचारिक रूप से सक्षम बनाना है ताकि लोग स्वयं सही निर्णय ले सकें। सरकार को डर भीड़ से नहीं, बल्कि विचारों के परिवर्तन से होना चाहिए।'
करणी सेना प्रमुख राज शेखावत पर भी आरोप लग रहे हैं कि वह नोएडा सांसद महेश शर्मा समेत पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं और आंदोलन से पीछे हट रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने आंदोलन के सही चेहरों के साथ बातचीत नहीं की तो प्रदर्शन और उग्र होगा। अलग बात है कि इस आंदोलन का चेहरा कौन है, यह तय ही नहीं हो पा रहा है।