हरियाणा कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर के लिए एम्पैनलमेंट नहीं दिया गया था। कोर्ट ने कहा है कि भले ही अशोक खेमका रिटायर हो चुके हैं, लेकिन भविष्य के असाइनमेंट और पदों पर विचार के लिए उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव, सचिव के स्तर पर एम्पैनल (पैनल में शामिल करना) माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब इसी तरह की परिस्थितियों में दूसरे अधिकारियों को नियमों में छूट देकर एम्पैनलमेंट का लाभ दिया गया, तो अशोक खेमका को इससे अलग रखना भेदभाव होगा और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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खेमका के खिलाफ नहीं चली दलील
हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसने खेमका की इस मांग को ठुकरा दिया था। कोर्ट ने यह भी माना कि केंद्र सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि खेमका का मामला अन्य अधिकारियों से अलग क्यों था। ऐसे में उन्हें राहत देते हुए निर्देश दिया गया कि उन्हें अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एम्पैनल्ड माना जाए और भविष्य के असाइनमेंट्स में उसी आधार पर देखा जाए।
क्या है पूरा मामला?
1991 बैच के IAS अधिकारी रहे अशोक खेमका लंबे समय तक प्रशासनिक फैसलों और चर्चित मामलों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। साल 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव या सचिव के पद पर एम्पैनल किया गया था। इसमें खेमका का नाम शामिल नहीं था। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि उन्होंने केंद्र सरकार में डिप्टी सचिव या उससे ऊपर के पद पर न्यूनतम 3 साल की नियुक्ति की अनिवार्य शर्त को पूरा नहीं किया है। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने इस नियम में ढील देने से इनकार करते हुए खेमका की याचिका खारिज कर दी थी।
अब क्यों हुई खेमका की जीत?
अशोक खेमका ने इस मामले में कोर्ट का रुख किया। उनके वकील ने कोर्ट में दलील दी की सरकार खेमका से भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रही है। उन्होंने ऐसे 20 अधिकारियों की लिस्ट कोर्ट में पेशी कि जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का जीरो अनुभव होने के बावजूद नियमों में ढील देकर अतिरिक्त सचिव या सचिव के रूप में एम्पैनल किया था। कोर्ट ने माना कि अधिकारियों को छूट दी गई थी। इसलिए खेमका के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए। इसके बाद खेमका को भविष्य में नए असाइनमेंट या प्रोजेक्ट मिल सकते हैं।
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चर्चा में रहे अशोक खेमका
अशोक खेमका ने 33 साल तक भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में सेवा दी है। 12 साल पहले उन्होंने एक ऐसे लैंड डील को रद्द किया था, जिसके तार रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से कथित तौर पर जुड़े हुए हैं। 33 साल के करियर में 50 से ज्यादा तबादला झेलने वाले अशोक खेमका को हर सरकार से शिकायत रही।