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सरसंघचालक मोहन भागवत ने बता दिया कि कब तक होना चाहिए आरक्षण?

RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बताया कि घुसपैठियों को पहचानने और डिपोर्ट करवाने में सरकार की मदद करनी चाहिए।

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मोहन भागवत । Photo Credit: PTI

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लोगों से अवैध घुसपैठियों को पहचानने और डिपोर्ट करवाने में सरकार की मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भाषा सुनकर इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है।

 

मुंबई में आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, 'सरकार को घुसपैठ रोकने के लिए बहुत काम करना है। उन्हें इन घुसपैठियों को ढूंढना और बाहर भेजना है। अब तक यह काम ज्यादा नहीं हो रहा था, लेकिन अब थोड़ा-थोड़ा शुरू हो गया है और आगे बढ़ता जाएगा।'

 

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उठाया घुसपैठियों का मुद्दा

उन्होंने आगे कहा कि जब जनगणना या स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) होता है, तो कई ऐसे लोग सामने आ जाते हैं जो इस देश के नागरिक नहीं हैं। वे खुद-ब-खुद बाहर हो जाते हैं। यह बात पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में चर्चा में है, जहां राजनीतिक विवाद चल रहा है।

 

भागवत ने सुझाव दिया, 'हम एक काम कर सकते हैं, हम घुसपैठियों को पहचानने में मदद कर सकते हैं। उनकी भाषा से वे पकड़े जाते हैं। हमें उन्हें ढूंढना चाहिए और सही अधिकारियों को बताना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'किसी विदेशी को नौकरी नहीं देनी चाहिए। अगर कोई हमारे देश का है, तो उसे नौकरी दें, लेकिन विदेशी को नहीं। हमें थोड़ा ज्यादा सतर्क और जागरूक रहना चाहिए।'

कौन बन सकता है सरसंघचालक?

आरएसएस प्रमुख बनने पर उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति आरएसएस का सरसंघचालक बन सकता है, चाहे वह अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से हो। उन्होंने कहा, 'क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होने से सरसंघचालक नहीं बनता। हिंदू बनता है, जो सबसे अच्छा काम करता है और सबसे योग्य है। SC या ST भी बन सकता है। संघ में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व है। फैसला काम और योग्यता पर होता है।'

 

अपने बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 75 साल की उम्र पूरी होने के बाद उन्होंने संघ को सूचना दी थी, लेकिन संघ ने उन्हें काम जारी रखने को कहा। 'जब संघ कहेगा तो मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से कभी रिटायर नहीं होऊंगा।' सरसंघचालक का चुनाव नहीं होता, क्षेत्रीय और प्रांतीय प्रमुख मिलकर फैसला करते हैं।

आरक्षण पर भी बोले भागवत

आरक्षण पर भागवत जी ने कहा, 'जब तक जरूरत है, जाति आधारित आरक्षण जारी रहना चाहिए। यह सद्भावना से हल होगा। हमें आपस में नहीं लड़ना चाहिए।' उन्होंने राजनेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता 'मैं ब्राह्मण हूं, मुझे वोट दो' कहकर वोट बैंक बनाते हैं, लेकिन समाधान सद्भावना से है।

 

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व्यापार समझौतों और कृषि पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन आदि के साथ डील हो रही हैं, लेकिन किसानों के हित पहले रखने चाहिए। 'खेती में किसान का अपना उत्पादन होना चाहिए। हमारी पुरानी जैविक खेती और बीज अच्छे थे। दुनिया से सीखें, लेकिन अपनी नजर से छानकर अपनाएं।'

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