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कंधे पर रखकर करेंगे दुश्मन पर हमला, US से एंटी टैंक मिसाइल जैवलिन खरीदेगा भारत

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी में है। इसको लेकर उच्च स्तर पर बातचीत जारी है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। Photo Credit: PTI

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भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस सहयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी में है। इस बात की पुष्टि खुद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 28 अगस्त को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत बैटल-टेस्टेड जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। सर्जियो गोर ने भी इसे भारत-अमेरिका डिफेंस रिलेशन के लिए बड़ा कदम बताया है।

 

सर्जियो गोर ने अपनी पोस्ट में मई 2026 में सिंगापुर में हुए शांगरी-ला डायलॉग का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय अमेरिकी डिफेंस मिनिस्टर ने भारत के लिए जैवलिन सिस्टम की अहमियत पर बात की थी। अब भारत की तरफ से इसे खरीदने की योजना सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच डिफेंस सहयोग को और आगे बढ़ाने की संभावना है।

 

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उच्च स्तर पर बातचीत जारी

सर्जियो गोर ने लिखा, 'भारत अमेरिका से युद्ध में परखी जा चुकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भी इसे हासिल करने की बात कही थी। यह भारत-अमेरिका के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत जारी है। 

क्यों खास है जैवलिन?

यह जैवलिन भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है और इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं। इसकी खास बात यह है कि इसे अलग-अलग इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है। यह सिस्टम खास तौर पर टैंक और दूसरे बख्तरबंद गाड़ियों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। इसकी खासियत यह है कि सैनिक मिसाइल दागने के बाद अपनी जगह बदल सकता है, क्योंकि इसमें फायर एंड फॉरगेट तकनीक का इस्तेमाल होता है।

 

इस सिस्टम की एक और खासियत टॉप अटैक क्षमता है। इसमें मिसाइल टारगेट के ऊपरी हिस्से को निशाना बना सकती है, जहां आमतौर पर टैंक की सुरक्षा बाकी हिस्सों के मुकाबले कम होती है। इसके अलावा जैवलिन में डायरेक्ट फायर मोड भी मौजूद है। इसका इस्तेमाल अलग तरह के टारगेट के खिलाफ किया जा सकता है।

 

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कितना खर्च करेगा भारत?

अमेरिका पहले ही भारत के लिए जैवलिन सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दे चुका है। नवंबर 2025 में अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका ने भारत को करीब 45.7 मिलियन डॉलर के संभावित जैवलिन सिस्टम और उससे जुड़े सामान की बिक्री को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में 100 जैवलिन राउंड, एक मिसाइल और 25 कमांड लॉन्च यूनिट शामिल थीं। इसके साथ ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स और दूसरे सपोर्ट सिस्टम खरीदने की भी बात की गई थी। 

 

अब अमेरिकी राजदूत के ताजा बयान से इस खरीद की पुष्टि हो गई है। हालांकि, अभी इस डील की डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की गई हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीत इस डील को लेकर उच्च स्तर पर बातचीत जारी है। उन्होंने अपने ट्वीट में साफ किया कि जैवलिन के को-प्रोडक्शन को लेकर भी बातचीत जारी है। 


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