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5 दिन की बैंकिंग व्यवस्था की मांग को लेकर चंडीगढ़ में बैंककर्मियों का प्रदर्शन

बैंक कर्मचारियों की मांग है कि वादे के मुताबिक, 5 दिन की बैंकिंग व्यवस्था को लागू किया जाए। इसी मांग को लेकर बैंक के कर्मचारियों ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किया। 

bank workers protest

प्रदर्शन करते बैंक कर्मचारी, Photo Credit: Khabargaon

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यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) के देशव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 17 स्थित बैंक स्क्वायर में विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक बड़ा प्रदर्शन किया। वे लंबे समय से लंबित 'पांच-दिन के बैंकिंग सप्ताह' को तुरंत लागू करने की मांग कर रहे थे। UFBU के बैनर तले देश भर की राज्य राजधानियों और महत्वपूर्ण शहरों व केंद्रों में ऑफिस के समय के बाद ये प्रदर्शन आयोजित किए गए। UFBU ने एक पूरा कार्यक्रम तय किया है, जिसमें 1 दिन की हड़ताल, 3 दिन की हड़ताल और फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल शामिल है। 

 

UFBU ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की ओर से MoU और सेटलमेंट/जॉइंट नोट में पांच-दिन की बैंकिंग शुरू करने पर सहमति जताने और सरकार को इसकी सिफारिश करने के बावजूद, इसमें लगातार देरी हो रही है। UFBU ने PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) को एकतरफा तरीके से जमा करने और DFS (वित्तीय सेवा विभाग) की ओर से पैदा की गई अशांति की निंदा की। सभा को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने कहा कि पांच-दिन की बैंकिंग की मांग न तो नई है और न ही अनुचित। बैंक कर्मचारी और अधिकारी सामूहिक सौदेबाजी (कलेक्टिव बारगेनिंग) की स्थापित प्रक्रिया के तहत बनी सहमति के लागू होने का धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस मुद्दे पर IBA और यूनियनों के बीच पहले ही सहमति बन चुकी है, वह सरकार की मंज़ूरी के लिए क्यों लंबित पड़ा है।

'बिना देरी के वादा पूरा करे सरकार'

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारी हर बड़ी चुनौती के समय- जिसमें वित्तीय संकट, नोटबंदी, कोविड-19 महामारी और विभिन्न सरकारी योजनाओं को लागू करना शामिल है, लगातार देश के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि पांच-दिन की बैंकिंग अब निष्पक्षता, कामगारों के सम्मान, काम और निजी जीवन के बीच संतुलन (वर्क-लाइफ बैलेंस) और आधुनिक कामकाजी माहौल का सवाल है और उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह बिना किसी और देरी के अपने वादे को पूरा करे।

 

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नेताओं ने यह भी बताया कि आधुनिक बैंकिंग अब केवल फिजिकल ब्रांच ऑपरेशन्स (शाखाओं के कामकाज) पर निर्भर नहीं है।  डिजिटल बैंकिंग, ATM, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम ग्राहकों को चौबीसों घंटे ज़रूरी बैंकिंग सेवाएं देते हैं। इसलिए, ग्राहकों की सुविधा या कामकाज की क्षमता से समझौता किए बिना 'फाइव-डे बैंकिंग' (हफ़्ते में पांच दिन बैंकिंग) लागू की जा सकती है। 

मांग नहीं मानने पर हड़ताल की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जिस मुद्दे पर पहले ही बातचीत और सहमति हो चुकी है, उसे लागू करने में हो रही लंबी देरी से बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों में काफ़ी नाराज़गी बढ़ रही है। UFBU ने पहले ही संकेत दिया है कि अगर यह मुद्दा अनसुलझा रहता है तो उसके सदस्य यूनियनें बैठक करेंगी और आगे की कार्रवाई (जिसमें हड़ताल भी शामिल हो सकती है) के बारे में फ़ैसला करेंगी। 

 

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प्रदर्शन में शामिल होने वाले और उसे संबोधित करने वाले प्रमुख नेताओं में जगदीश राय, इक़बाल सिंह मल्ही, राजीव सिरहिंदी, संजय सिन्हा, गुरबख्श सिंह, पंकज शर्मा, ऋषि उपाध्याय, क्रांति, गौरव, प्रेम पंवार, विनय, विभोर, युगेश, राज कुमार अरोड़ा, हरप्रीत मान, सचिन कटियार, अजय गैपुरिया, मुकेश कुमार, रोहन टंडन और अमनदीप सिंह शामिल थे। इनके अलावा, चंडीगढ़ और आस-पास के इलाक़ों के अलग-अलग बैंकों से बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी और अधिकारी भी मौजूद थे। सभा ने सर्वसम्मति से भारत सरकार से मांग की कि बैंकिंग इंडस्ट्री में सभी शनिवार को छुट्टी घोषित करने और बिना किसी और देरी के 'फाइव-डे बैंकिंग वीक' लागू करने को तुरंत मंज़ूरी दी जाए। 

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