2 करोड़ फॉलोअर्स पर जंतर-मंतर खाली! CJP की 'फ्लॉप' भीड़ का पूरा सच क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी के आलोचक कह रहे हैं कि जंतर मंतर जैसे सिर्फ 4.6 एकड़ वाले इलाके को भी पूरी तरह से भर पाने में पार्टी का नेतृत्व असफल रहा है।

जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी। Photo Credit: PTI
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की गुहार पर दिल्ली के जंतर-मंतर परिसर में हजारों लोग उमड़े। कुछ घटों के इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान, अपने पद से इस्तीफा दें, NEET, NTA और CBSE की परीक्षाओं में आईं धांधली पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें। केंद्र सरकार ने इस प्रदर्शन पर कुछ कहने से चुप्पी साधी लेकिन दिल्ली पुलिस ने व्यापक प्रदर्शन की इजाजत दी। कॉकरोच जनता पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि दिल्ली पुलिस का सहयोग मिला। कोई अप्रिय समाचार नहीं सामने आया।
अभिजीत दीपके, 1 साल से अमेरिका में रहते हैं। शनिवार को वह दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट उतरे और वहीं से सीधे जंतर मंतर चले गए। जब वह एयरपोर्ट पर पहली बार दिखे तो हाथों में उनके डॉ. भीम राव आंबेडकर की जीवनी थी। उन्होंने लोगों से फूल, तिरंगा और किताब लाने की अपील की थी।
एक व्यंग से जन्मा आंदोलन, दिल्ली तक पहुंचा, लोगों को एकजुट करने में सफल रहा और अपनी मांगों को खुलकर देश के सामने रखा। आंदोलन की सफलता पर अब कुछ सामाजिक संगठन, राजनीतिक पार्टियां और पत्रकार सवाल उठा रहे हैं। इन लोगों में सरकार के आलोचक भी हैं, वे भी हैं, जो किसी पार्टी की आईटी सेल में काम करते हैं, पक्षपाती पत्रकार भी हैं और आम जनता भी हैं।
यह भी पढ़ें: 'मुझे बताया कि इवेंट करना है...', कॉकरोच पार्टी ने मनोज झा के साथ खेल कर दिया?
आंदोलन सफल हुआ या नहीं, क्या कह रहे हैं लोग?
आरफा खानम शेरवानी, पत्रकार:-
एक बात मुझे ईमानदारी से कहनी पड़ेगी कि सोशल मीडिया पर जो 2 करोड़ लोग दिख रहे थे, उसका एक अंश भी नहीं आए थे। 1 हजार से 2 हजार लोग जमा हो सकते हैं लेकिन कहां 2 करोड़ और कहां 1 हजार लोग।
क्यों अन्ना आंदोलन जैसा असर नहीं दिखा?
अन्ना आंदोलन, महीनों की तैयारी की उपज थी। कॉकरोच आंदोलन, 1 महीने पुराना सोशल मीडिया ऑनलाइन कैंपेन था, जिसे आवाज मिल गई। अभिजीत दीपके, पार्टी के संस्थापक हैं, वह 2 साल से विदेश में थे। अमेरिका में रहने के बाद भी उन्होंने एक पुकार पर जंतर मंतर पर 2 हजार की भीड़ जुटा ली। 2 करोड़ फॉलोअर वाली यह पार्टी, 20 हजार लोगों को भी नहीं जुटा सकी, इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
यह भी पढ़ें: इस्तीफे की मांग, हंगामा, ट्रोलिंग..., जंतर मंतर पर CJP को प्रदर्शन से क्या मिला?
जेन जी कॉकरोच प्रोटेस्ट से भटके क्यों?
कॉकरोच जनता पार्टी का आम आदमी पार्टी के साथ पुराना कनेक्शन है। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के कैंपेन का हिस्सा रहे हैं। अभिजीत दीपके 2020 से 2023 के बीच अरविंद केजरीवाल की AAP के सोशल मीडिया और चुनाव अभियानों से जुड़े रहे। वह कम्युनिकेशन टीम में काम करते थे, डिजिटल मार्केटिंग का काम देखते थे। कुछ जेन जी ने अलग-अलग इंटरव्यू में कहा कि कॉकरोच पार्टी का आम आदमी पार्टी से कनेक्शन पता चला तो लोगों ने पांव पीछे खींच लिया। वे किसी पार्टी की प्रॉक्सी पार्टी का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं।
कैसा रहा आंदोलन?
6 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हजारों युवा जमा हुए। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कई छात्रों की आत्महत्या और खराब शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में गुस्सा दिखा। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए। लोगों ने एक सुर में बात कही कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। 3.30 तक आंदोलन खत्म हो गया और फिर अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के बास 7 दिनों का समय है। अगर धर्मेंद्र प्रधान हटाए नहीं जाते हैं तो आंदोलन फिर से होगा।
विपक्ष ने कैसे समर्थन दिया?
विपक्षी पार्टियों जैसे शिवसेना (यूबीटी) और समाजवादी पार्टी ने आंदोलन का समर्थन किया। विश्लेषकों का कहना है कि पेपर लीक जैसे मुद्दे हर परिवार को छूते हैं, इसलिए इसे व्यापक समर्थन मिल रहा है। जमीनी प्रदर्शन, अमेरिका में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता है, इसलिए जमीन पर उतरना जरूरी है।
अगर अभिजीत दीपके, फिर से अमेरिका नहीं लौटे तो हो सकता है कि यह आंदोलन थोड़ा और सफल हो सके। सरकार ने प्रदर्शन की अनुमति आसानी से दे दी, जिसे कुछ लोग वॉटर टेस्टिंग की रणनीति मान रहे हैं। कॉकरोच पार्टी का राजनीतिक भविष्य अभी अनिश्चित है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन में अपेक्षित भीड़ न जुटने की मुख्य वजह सोशल मीडिया की हाइप बनाम ग्राउंड रियलिटी का अंतर, भयंकर गर्मी और आंदोलन की नईता बताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: हाथ में आंबेडकर की जीवनी लेकर भारत आए अभिजीत दीपके, इरादे क्या हैं?
क्यों सोशल मीडिया के 2 करोड़, जमीन पर नहीं दिखे?
राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकारों का कहना है कि ऑनलाइन करोड़ों फॉलोअर जुटाना और रजिस्ट्रेशन कराना काफी नहीं होता है। कॉकरोच पार्टी, अभी हवा-हवाई पार्टी है। जन पार्टी कहीं रजिस्टर्ड है, न पदाधिकारी हैं, न ही कोई दफ्तर है। नेताओं में भी कोई पॉपुलर फीगर नहीं है, जिसके नाम पर लोग उमड़ पड़ें।
ज्यादातर युवा, सिर्फ सोशल मीडिया पर ही कॉकरोच पार्टी का साथ दे रहे हैं, कुछ लोगों का कहना है कि पहले ही इस कैंपेन की इतनी निगेटिव कैंपेनिंग की गई है कि लोग आने से कतराने लगे। कुछ पत्रकारों ने लिखा है कि यह जस्टिस सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के खिलाफ गुस्सा था कि इतने भी आ गए, वरना किसी नए मुद्दे पर भीड़ खींचना, सधे हुए राजनेताओं के लिए भी आसान नहीं रहा।
क्यों कॉकरोच जनता पार्टी की नींव पड़ी?
जस्टिस सूर्यकांत ने एक केस की मौखिक टिप्पणी में बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से कर दी थी। 15 मई को दिए गए इस बयान के बाद उनकी व्यापक आलोचना हुई थी, युवाओं ने पहली बार किसी जज की इस तरह मुखर होकर आलोचना की थी। बात में इस आंदोलन ने जनहित के मुद्दों का भी जिक्र किया और सरकार-सिस्टम पर सवाल खड़े किए। धर्मेंद्र प्रधान, इस आंदोलन के बाद से ही जेन जी युवाओं के निशाने पर हैं।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap



