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धार भोजशाला: पूजा भी होगी, नमाज भी होगी, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया समय

धार भोजशाला विवाद पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बसंत पंचमी के दिन हिंदू धर्म के लोग यहां पूजा कर सकेंगे और नमाज भी पढ़ी जाएगी।

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धार भोजशाला, File Photo: ANI

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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला पर अपना फैसला सुना दिया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू धर्म के लोग यहां पूजा कर सकेंगे। साथ ही, दोपहर में 1 बजे से 3 बजे तक नमाज भी पढ़ी जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जो लोग नमाज पढ़ने आएंगे, उनकी एक लिस्ट जिला प्रशासन को दी जाए।

 

इस फैसले के आने से पहले ही धार शहर हाई अलर्ट पर था। भोजशाला वाले इलाके को एकदम छावनी में बदल दिया गया था। पिछले एक हफ्ते से हजारों सुरक्षाकर्मी यहां तैनात किए गए थे। दरअसल, साल 2016 में बसंत पंचमी शुक्रवार को थी और नमाज के समय और पूजा के समय को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। यही वजह है कि इस बार पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई थी।

 

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हिंदू और मुस्लिम समूह चाहते थे कि 23 जनवरी यानी शुक्रवार को भोजशाला परिसर में उन्हें धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी जाए। इसी दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी की जाएगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे आपसी सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखें और ऐसा करने में राज्य और जिला प्रशासन का सहयोगभी करें। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वहां पर कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए।

 

सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंची बात?

 

साल 2024 में मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, धार की ओर से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए एक स्पेशल लीव पिटीशन दायर की गई थी। दरअसल, हाई कोर्ट ने ASI को निर्देश दिए थे कि वह इस विवादित परिसर का सर्वे करे। अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश देते हुए इस सर्वे को जारी रखने की अनुमति दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी भी तरह की ऐसी खुदाई नहीं की जाएगी जिससे कोई ढांचागत बदलाव आए।  

 

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गुरुवार को हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका दायर की थी और सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा और हवन करने की अनुमति मांगी थी। वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद पेश हुए थे। उन्होंने 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति मांगी थी। सलमान खुर्शीद ने तर्क रखा कि नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग जगह खाली कर देंगे। केंद्र सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और मध्य प्रदेश की ओर से एडवोकेट जनरल पेश हुए। इन सभी ने वादा किया है कि कानून व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा। विष्णु शंकर जैन ने यह भी पूछा था कि क्या नमाज 5 बजे के बाद रख सकते हैं? इस पर सलमान खुर्शीद ने असहमति जताई। 


क्या है विवाद?

 

दरअसल, हिंदू धर्म के लोग भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में है और 11वीं शताब्दी का स्मारक है। ASI की ओर से 7 अप्रैल, 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू धर्म के लोग मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं और मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।

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