बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव में महायुति को जीत मिली है, जबकि शिवसेना (UBT), मनसे के साथ में विपक्ष को हार। महायुति अपना मेयर चुनने की कवायद में जुटी हुई है। इसी बीच खबर आई कि शिवसेना (UBT) के टिकट पर जीतकर आई नई नवेली पार्षद सरिता म्हास्के गायब हो गई हैं। इससे यह अटकलें लगने लगीं कि सरिता बीजेपी-शिवसेना के टच में हैं। मगर, शिवसेना (UBT) ने गुरुवार को अपनी पार्षद सरिता म्हास्के की वापसी की घोषणा कर दी।
सरिता बुधवार को पार्टी के पार्षदों के ग्रुप को रजिस्टर करने के समय संपर्क में नहीं थीं। ऐसे में अटकलें थीं कि वह उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो रही हैं।
कैसे हुई वापसी?
हालांकि, गुरुवार को शिवसेना (UBT) के सीनियर नेता मिलिंद नार्वेकर ने रात को सरिता म्हास्के से मुलाकात की। सरिता से मुलाकात के बाद कहा नार्वेकर ने कहा, 'सरिता म्हास्के पार्टी में वापस आ गई हैं। मैं बस इतना कह सकता हूं कि अंत भला तो सब भला।' सरिता बीएमसी चुनाव से पहले एकनाथ शिंदे की शिवसेना छोड़कर उद्धव ठाकरे ग्रुप में वापस आ गई थीं।
यह भी पढ़ें: कुत्ता घुमाने के लिए खाली करा देते थे स्टेडियम, MCD कमिश्नर बन गए संजीव खिरवार
सरिता म्हास्के पार्टी में वापस आ गई हैं- नारवेकर
नारवेकर ने कहा, 'सच तो यह है कि सरिता म्हास्के पार्टी में वापस आ गई हैं और सभी जीते हुए 65 पार्षद हमारे साथ हैं।' बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने 227 में से 118 सीटों पर जीत दर्ज की है। बीजेपी के 89 और शिवसेना के 29 पार्षद हैं। वहीं, शिवसेना (UBT) 65 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
यह भी पढ़ें: चेकिंग के नाम पर साउथ कोरिया की महिला से छेड़खानी, एयर इंडिया का स्टाफ गिरफ्तार
मुंबई में चल क्या रहा है?
बता दें कि बीजेपी मुंबई के साथ में महाराष्ट्र के अन्य 20 दूसरे नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसी कड़ी में उद्धव ठाकरे परिवार 25 साल में पहली बार बीएमसी की सत्ता से बाहर हो गई। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका शिवसेना (UBT) के दो नए चुने गए पार्षद एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा दो पार्षदों के राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, शिवसेना (UBT) नेताओं ने कहा है कि दोनों पार्षद MNS से थे।
MNS ने बुधवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में शिवसेना को समर्थन दिया, जिससे एकनाथ शिंदे की बहुमत पाने की दावेदारी मजबूत हुई है। साथ ही ठाकरे भाइयों के बीच गठबंधन को झटका लगा है।