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DLF ने फ्लैट बनाए लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं, SC ने दिए CBI जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ खरीददारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुग्राम के सेक्टर 82A में DLF प्राइमस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में CBI जांच के आदेश दे दिए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट, Photo Credit: PTI

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के सेक्टर 82A में DLF प्राइमस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में कथित गड़बड़ियों की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) जांच के आदेश दे दिए हैं। यह प्रोजेक्ट काफी समय से विवादों में चल रहा था। कोर्ट ने कहा कि फ्लैट खरीदने वाले कई लोग अपने सपने पूरे नहीं कर पाते और घर खरीदने वालों से जो वादा किया गया है और जो वास्तव में हुआ है उसके बीच बहुत बड़ा अंतर है। 

 

सुप्रीम कोर्ट में इस प्रोजेक्ट के तहत घर खरीदने वाले खरीददारों की चायिका पर सुनवाई की। खरीददारों ने नेशनल कंज्यूमर फोरम के ऑर्डर के बाद कोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने इस मामले में उपभोक्तों को बचाने के लिए बनी रेगुलेटरी अथॉरिटीज की भूमिका पर भी चिंता जताई। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अभी जांच के बाद तथ्य सामने आने पर फैसला दिया जाएगा। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लोग अपनी जिंदगी की पूरी बचत एक छोटा सा घर या फ्लैट खरीदने में लगा देते हैं। इसके बावजूद वे अक्सर अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। 

 

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क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 2012 में शुरू हुए ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है। अपील करने वाले खरीददार ने अगस्त 2012 में एक अपार्टमेंट बुक किया था। खरीददारों ने आरोप लगया कि DLF ने अपने ब्रोशर और लेआउट प्लान में दिखाया कि प्रोजेक्ट से दो 24-मीटर सेक्टर रोड जुड़ी हुई हैं, जबकि दोनों में से कोई भी सेक्टर रोड नहीं थी। दावा किया गया है कि एक सड़क का हिस्सा किसानों से लीज पर ली गई प्राइवेट जमीन पर है और दूसरी सड़क बनी ही नहीं। खरीददारों का कहना है कि अगर लीज का समय खत्म हो गया तो सड़क बंद हो सकती है।

 

खरीददारों ने बताया कि 7 अक्टूबर, 2016 का ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिल गया और 27 जनवरी, 2017  से उन्हें फ्लैट पर अधिकार (कब्जा) भी मिल गया लेकिन कई सुविधाएं अधूरी थी। खरीददारों ने बताया कि पानी भी टैंकरों से आता था और बिजली भी शुरू में जनरेटर से आती थी। उन्होंने सुपर एरिया बढ़ाने, बल्क पावर सप्लाई, गैस पाइपलाइन चार्ज, एस्केलेशन चार्ज, VAT, सर्विस टैक्स और मेंटेनेंस सिक्योरिटी की मांगों को भी गलत बताया। 

2023 में सड़कें बनाने के निर्देश

साल 2023 में इस मामले में नेशनल कमीशन ने खरीददारों की शिकायतों को कुछ हद तक सही मानते हुए कहा कि प्राइवेट सड़कों को सेक्टर रोड के तौर पर दिखाना गलत है। कमीशन ने डेवलपर को हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिए छह महीने के अंदर एक्सेस रोड का हिस्सा बनने वाली प्राइवेट लैंड को एक्वायर करने  और दोनों एक्सेस रोड का कंस्ट्रकशन पूरा करने का निर्देश दिया। 

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। खरीददारों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी कि NCDRC के डेवलपर को हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA) के जरिए छह महीने में प्राइवेट जमीन लेने के निर्देश के बावजूद, जमीन नहीं ली गई। इसके बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चली। 

 

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रेगुलेटरी अथॉरिटीज पर उठे सवाल

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने आगे कहा कि कानूनी और रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि कई घर खरीदने वाले अपनी पूरी जिंदगी की बचत घर खरीदने में लगा देते हैं। उन्होंने कोर्टम में कहा कि HUDA के अनुसार, इस जमीन को नहीं लिया जा सकता, क्योंकि मौजूदा पॉलिसी के अलावा किसान से प्राइवेट जमीन लेने की कोई पॉलिसी नहीं है। इसलिए उस प्रोजेक्ट तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। इन दलीलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए।

कोर्ट ने दिए CBI जांच के आदेश

कोर्ट ने कहा कि जब ऑर्गेनाइजड रियल एस्टेट सेक्टर में ऐसे मामले होते हैं तो आम उपभोक्ताओं की स्थिति का तो अंदाजा लगाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले पर बहुत सख्त नजरिया अपनाने को मजबूर हुए हैं। कोर्ट ने खरीददारों के वकील से CBI के डायरेक्टर से मिलने और जरूरी जानकारी उन्हें देने के लिए कहा है। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को CBI जांच में सहयोग करने के लिए कहा है। CBI को इस मामले में 25 अप्रैल,2026 को या उससे पहले कोर्ट के सामने अपनी फाइंडिंग्स और प्रोग्रेस रिपोर्ट रखने को कहा गया हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल, 2026 को होगी। 

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