सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिकाकर्ता को फटकार लगाई जो कि खुद ही कोर्ट में पेश हुआ था। कोर्ट को शक हुआ कि जनहित याचिका (PIL) उन्होंने खुद नहीं लिखी है। इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने याचिका की सच्चाई पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि अगर पेटीशन ड्राफ्ट करने वाले असली व्यक्ति का नाम नहीं बताया गया तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से सीधे पूछा, 'क्या तुमने खुद यह याचिका तैयार की है?' इस पर याचिकाकर्ता ने ‘हां’ कहा और अपना फोन कोर्ट में जमा करने की बात कही। फिर बेंच ने याचिकाकर्ता की पढ़ाई के बारे में पूछा। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है और लुधियाना के सनातन धर्म स्कूल में पढ़े हैं।
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कहा- लेंगे अंग्रेजी की परीक्षा
चीफ जस्टिस ने कहा, 'हम कोर्ट में ही तुम्हारी अंग्रेजी की परीक्षा ले सकते हैं। अगर 30 नंबर आएंगे तो फिर देखेंगे।' इसके बाद भी याचिकाकर्ता ने दावा किया कि याचिका उसने खुद बनाई है और फोन देने को की बात कहता रहा। बेंच ने याचिका में इस्तेमाल किए गए कई मुश्किल कानूनी शब्दों पर भी ध्यान दिया। चीफ जस्टिस ने पूछा, 'फिड्यूशियरी रिस्क टू कॉर्पोरेट डोनर्स' का क्या मतलब है?' याचिकाकर्ता यह समझा नहीं पाए।
जैकेट गिफ्ट कर कराई टाइपिंग
आखिर में कोर्ट ने आखिरी बार पूछा कि किस वकील ने यह याचिका बनाई है। याचिकाकर्ता ने मान लिया कि उन्होंने AI टूल्स की सहायता से बनाया है और सुप्रीम कोर्ट के एक टाइपिस्ट ने इसे टाइप किया। उन्होंने दावा किया कि टाइपिस्ट ने इसके लिए प्रति घंटा 1000 रुपये चार्ज किए और याचिकाकर्ता ने उन्हें चार जैकेट भी गिफ्ट किए। यह सुनकर बेंच ने टाइपिस्ट को कोर्ट में बुलाने का आदेश दिया।
कहा- जाओ और स्वेटर बेचो
चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसा लगता है कि याचिका किसी और ने बनाई है। याचिकाकर्ता ने सिर्फ अपना नाम दिया है। उन्होंने कहा, 'यह याचिका स्पष्ट नहीं है। जिस लहजे में यह लिखा गया है और जिस तरह की संवैधानिक दलीलें इसमें दी गई हैं इसका लहजा और संवैधानिक दलीलें ऐसी नहीं लगती हैं कि यह इस छोटे व्यापारी ने दी हैं।'
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कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और सख्त चेतावनी दी। चीफ जस्टिस बोले, 'हम ऐसी फालतू याचिका पर पूरी जांच नहीं करवा रहे लेकिन भविष्य में ऐसी याचिका मत दाखिल करना।' मजाक में उन्होंने कहा, 'जाओ, जाकर कुछ और स्वेटर बनाकर बेचो। अगर ऐसे PIL दाखिल करते रहे तो जुर्माना भरना पड़ सकता है।'