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'अंबानी के 1 लाख वोट होंगे और आम आदमी का 1 वोट', ऐसा क्यों बोले तेजस्वी सूर्या?

परिसीमन विधेयक 2026 पर संसद में खूब हंगामा हो रहा है। दक्षिण भारतीय राज्यों का तर्क है कि इससे संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम होगा। लोकसभा में विपक्ष के तर्कों का जवाब बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने दिया है।

Tejasvi Surya

बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या। (Photo Credit: FB/Tejasvi Surya)

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बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने परिसीमन विधेयक 2026 पर लोकसभा में विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला। उनका कहना है कि परिसीमन के नाम पर दक्षिण भारत में लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। बीजेपी सांसद का दावा है कि परिसीमन विधेयक में सभी राज्यों को के समान अधिकार हैं। यह सच नहीं है कि परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को का नुकसान होगा। तेजस्वी सूर्या ने दावा किया कि परिसीमन का बहाना बनाकर विपक्ष महिला आरक्षण विधेयक को रोकने का प्रयास कर रहा है।

 

तेजस्वी सूर्या ने लोकसभा में तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी का जिक्र किया। तेजस्वी सूर्या ने कहा तेलंगाना सीएम ने बहुत ही हाइब्रिड मॉडल का प्रस्ताव रखा है। वह राज्यों की जनसंख्या को जीएसडीपी से जोड़ना चाहते हैं। मुझे नहीं पता है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को सलाह कौन देता है? यह प्रस्ताव सिर्फ मजाक है। यह व्यावहारिक नहीं है। अगर आप यह कहेंगे कि तेलंगाना के नागरिक का वोट बिहार के आम आदमी से अधिक कीमती है तो यह संवैधानिक सिंद्धात एक नागरिक-एक वोट के मूल्य का उल्लंघन है। आप किसके आधार पर देश में डिलिमिटेशन करना चाहते हैं? जो अमीर है, क्या उनके वोट ज्यादा होंगे। जो गरीब है, क्या उनका वोट नहीं होगा। यह कैसा तर्क है।

 

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बीजेपी सांसद ने आगे कहा कि अगर इस तर्क को आगे बढ़ाया जाता है तो मुकेश अंबानी के पास एक लाख वोट होंगे और हमारे जैसे किसी अन्य का सिर्फ एक वोट होगा। तेलंगाना सीएम का डिलिमिटेशन को जीएसडीपी से जुड़ने का तर्क मूर्खतापूर्ण है। यह असंवैधानिक है। यह एक वोट- एक वैल्यू का उल्लंघन है। 

 

तेजस्वी सूर्या ने कहा कि हम सीटों को बढ़ाकर 815 और कुल 850 करने जा रहे हैं। हर राज्य को आनुपातिक हिस्सेदारी के आधार पर सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु में अभी 39 सीटें हैं। बाद में यह 59 हो जाएंगी। कर्नाटक में 28 सीटें हैं, उसे 42 सीटें मिलेंगी। आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 38 सीटें हो जाएंगी। 17 सीटों वाले तेलंगाना को 26 सीटें मिलेंगी। केरल में अभी 20 सीटें हैं, उसे कुल 30 सीटे मिलेंगी।

 

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बरकरार रहेगी दक्षिण के राज्यों की हिस्सेदारी: तेजस्वी

तेजस्वी सूर्या ने आगे बताया कि आनुपातिक हिस्सेदारी में आंध्र प्रदेश 52%, तेलंगाना 52%, कर्नाटक 51%, तमिलनाडु 51.5% और केरल को 50% की हिस्सेदारी मिलेगी। आज सभी दक्षिण भारतीय राज्यों की संसद में हिस्सेदारी 23.9% हैं। परिसीमन के बाद भी 23.9 फीसद हिस्सेदारी को बरकरार रखा जाएगा। 

 

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राज्यों के आनुपातिक हिस्सेदारी की रक्षा कर रही है। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने जो मांग की, नरेंद्र मोदी की सरकार बिल्कुल वही कर रही है। मगर आज तमिलनाडु में संवैधानिक संशोधन विधेयक को जलाकर ड्रामा किया जा रहा है।  

अगर आनुपातिक हिस्सेदारी नहीं होती तो क्या होता?

तेजस्वी सूर्या ने बताया कि अगर सीटों का इजाफा 50 फीसदी आनुपातिक हिस्सेदारी के आधार पर नहीं होता तो क्या होता? एक तर्क यह है कि 543 सीटों की लिमिट के बिना 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का इजाफा कर दिया जाए। अगर 2011 की जनगणना के आधार पर बिना 50 फीसद आनुपातिक हिस्सेदारी के सीटों को बढ़ाया जाता है तो तमिलनाडु के पास आज 39 सीटें हैं।  अगर 2011 की जनगणना के आधार पर डिलिमिटेशन होता है तो तमिलनाडु को 49 सीटें मिलती। आज नरेंद्र मोदी सरकार ने तमिलनाडु को 10 सीटें अधिक यानी 59 सीटें दी हैं।

 

केरल के पास 20 सीटें हैं। केरल को सिर्फ 23 सीटें मिलती। मगर आज केरल को 30 सीटें मिलेंगी। कर्नाटक में 28 लोकसभा सीटें हैं। अगर केवल जनसंख्या के आधार पर तय किया जाता तो कर्नाटक को 41 सीटें मिलती। अब उसे 42 सीटें मिलेंगी। आंध्र प्रदेश में 25 सीटें हैं। 2011 की जनगणना के आधार पर उसे 33 सीटें मिलती। 50 फीसद आनुपातिक हिस्सेदारी के आधार पर उसे 37 सीटें मिलेंगी।


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