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द्रौपदी के चीरहरण से UGC विवाद पर क्या समझा गए पहलवान योगेश्वर दत्त?

यूजीसी विवाद को लेकर ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने पांडवों और विभीषण का उदाहरण देकर पूरे मामले पर अपनी राय व्यक्त की है।

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योगेश्वर दत्त । Photo Credit: PTI

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ओलंपिक पदक विजेता और मशहूर पहलवान योगेश्वर दत्त ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के हालिया विवादास्पद ड्राफ्ट को लेकर एक जोरदार पोस्ट किया है। उन्होंने महाभारत के प्रसंगों का जिक्र करते हुए प्रतिभा के दमन, अन्याय और पूर्वाग्रह की आलोचना की है। दत्त की इस पोस्ट ने यूजीसी के नए नियम को लेकर चल रहे विवाद को नई दिशा दी है। यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी गर्माया हुआ है और इसे सवर्णों का विरोधी बताया जा रहा है।

 

योगेश्वर दत्त की पोस्ट में उन्होंने विभीषण के नाम के अर्थ का उदाहरण देते हुए कहा कि गुस्सा न आने वाला व्यक्ति भी अगर अपने कुल का द्रोही हो तो सम्मान नहीं पाता। उन्होंने महाभारत के द्रौपदी चीरहरण प्रसंग का हवाला दिया, जहां बड़े-बड़े योद्धाओं ने सत्ता के लालच में चुप्पी साध ली और अंत में सबका सर्वनाश हो गया। दत्त ने लिखा, 'एक दिन सभी को काल के गाल में जाना है। कोई अजर-अमर होकर नहीं आया, इसीलिए अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है।'

 

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पांडवों का दिया उदाहरण

उन्होंने पांडवों का उदाहरण देते हुए कहा कि संख्या में कम होने के बावजूद गुणों और प्रतिभा से सुसज्जित होने पर ईश्वर खुद उनके सारथी बन गए। पोस्ट में उन्होंने प्रतिभा के दमन को सभ्यता और संस्कृति के लिए घातक बताया और कहा कि आक्रांताओं के आक्रमण झेलकर भी जिन पूर्वजों ने धर्म और सीमाओं की रक्षा की, आज उनकी संतानों को अपने ही देश में संरक्षण के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

 

उन्होंने चेतावनी दी कि पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर देश को गर्त में धकेलने से बाहरी शत्रुओं का मनोबल बढ़ेगा और समय रहते न संभले तो न इतिहास में जगह मिलेगी, न भविष्य बचेगा। उन्होंने कहा कि सही समय पर क्रोध करने की आवश्यकता होती है।

क्या है विवाद?

यह पोस्ट UGC के हालिया ड्राफ्ट गाइडलाइंस को लेकर आई है, जो उच्च शिक्षा में कथित रूप से भेदभाव को रोकने से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं और सड़क पर भी इसके खिलाफ उतरने की तैयारी भी चल रही है। एक वर्ग इन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहा है तो दूसरे वर्ग का मानना है कि इनके चलते ही विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोका जा सकेगा।

 

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यह सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में लागू होगा और इन संस्थानों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के साथ साथ टीचर और स्टाफ भी इसकी जद में आएंगे। हालांकि, मृत्युंजय तिवारी नाम के एक शख्स ने यूजीसी रेगुलेशन, 2026 के रूल 3 (C) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा है कि नए नियम जातिगत भेदभाव को सिर्फ OBC और SC-ST तक सीमित करते हैं।

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