ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण यहां से जहाज गुजर नहीं पा रहे हैं। ईरान कभी नहीं चाहेगा कि स्ट्रेट बंद या ब्लॉक हो। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी खुला है। यह बात भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शुक्रवार को कही। उन्होंने आगे कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दुनियाभर में लोग परेशान हैं। दुनियाभर के नेताओं को ट्रंप पर युद्ध रोकने का दबाव बनाना चाहिए।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, 'ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया है। यह अब भी खुला है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण जहाज वहां से गुजर नहीं पा रहे हैं। ईरान कभी नहीं चाहेगा कि स्ट्रेट बंद या ब्लॉक हो। कुछ जहाज अब भी गुजर रहे हैं। जिन्होंने जंग शुरू की, उन्हें ही इसे रोकना होगा। युद्ध के कारण दुनियाभर में बहुत से लोग परेशान हैं। दुनिया के नेताओं को एकजुट होकर अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव डालना चाहिए और इस गलत जंग को तुरंत रोकने का अनुरोध करना चाहिए।'
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होर्मुज को बंद करने का इरादा नहीं: ईरान
सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही के अलावा संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संबंध में ईरान का पक्ष रख चुके हैं। उनका कहना है कि ईरान का कभी इसे बंद करने का इरादा नहीं था। ईरान समुद्री नियमों के तहत नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का सम्मान करता है। उसके लिए प्रतिबद्ध है। स्ट्रेट की हालत कोई ईरानी कार्रवाई की नतीजा नहीं है। वाटरवे में शांति और सुरक्षा को बनाए रखना ईरान का अधिकार है। यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान के पास आत्मरक्षा में अपने अधिकार का इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
क्या सच है ईरान का दावा?
होर्मुज स्ट्रेट खुले होने के ईरानी दावों के बावजूद यहां तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है। फारस की खाड़ी में ही 'सेफ सी विष्णु' नाम के जहाज पर हुए हमले में एक भारतीय की जान गई है। कई अन्य तेल टैंकरों पर भी हमला किया जा चुका है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल की संयुक्त एयर स्ट्राइक के बाद ईरान पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को तेहरान निशाना बना रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर यातायात बाधित होने से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।
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क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
दुनियाभर में तेल और एलएनजी एक्सपोर्ट का करीब 20 फीसद हिस्सा यही से गुजरता है। गुरुवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि भारत पहले करीब 55 फीसद कच्चा तेल अन्य रूट से खरीदता था। मगर अब इसे बढ़ाकर 70 फीसद कर दिया गया है। मतलब साफ है कि भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। मौजूदा समय में भारत सरकार 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल और एलएनजी खरीद रही है।