• NEW DELHI 08 Sept 2026, (अपडेटेड 08 Sept 2026, 6:24 AM IST)
सीमावर्ती गांवों के लिए बनी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में मंजूर प्रोजेक्ट्स और पूरे हुए काम के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ऐसा क्यों है, वजहें क्या हैं, कौन से प्रोजेक्ट अधूरे हैं, आंकड़ों से समझिए।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के तहत गृह मंत्रालय (MHA) ने अब तक 1,248 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, लेकिन जुलाई 2026 तक इनमें से केवल 283 प्रोजेक्ट ही पूरे हो पाए हैं। इन मंजूर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 3,020.32 करोड़ रुपये आंकी गई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक सिर्फ 953.47 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं।
यह योजना उत्तरी सीमा से सटे सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए 2023 में शुरू की गई थी। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के शुरुआती चरण में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख को शामिल किया गया है, जहां कुल 662 गांवों को प्राथमिकता के आधार पर चुना गया था। इन गांवों की कुल आबादी करीब 1.42 लाख है।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा 832 प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश को मंजूर हुए हैं। इसके बाद उत्तराखंड को 152, हिमाचल प्रदेश को 98, लद्दाख को 79 और सिक्किम को 87 प्रोजेक्ट मिले हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि मंजूरी में अरुणाचल प्रदेश को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जबकि बाकी चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में यह संख्या काफी कम है।
केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों ने तालमेल के तहत 1,655 और प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं। सीधे गृह मंत्रालय के अलावा दूसरे मंत्रालयों की योजनाओं को भी इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है, लेकिन इनके पूरा होने की अलग से कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अरुणाचल प्रदेश जिले के अनेली आरजू ब्लॉक का अडाने गांव। Photo Credit: MHA
सड़कों और पुल के लिए 4,800 करोड़ का बजट, कितना काम?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के पहले चरण के तहत कुल 4,800 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, जिसमें से 2,500 करोड़ रुपये सिर्फ सड़क संपर्क के लिए तय किए गए। अब तक 2,481.93 करोड़ रुपये की लागत से 111 सड़क प्रोजेक्ट मंजूर हो चुके हैं। इन सड़कों से 134 ऐसे गांवों को जोड़ा जाना है, जहां पहले कोई सड़क संपर्क नहीं था। इसके साथ ही 35 बड़े पुल भी मंजूर किए गए हैं। मंजूरी और पूरा होने के आंकड़ों में जो फासला दिख रहा है, उसी तरह का अंतर कई सड़क प्रोजेक्ट में भी होने की आशंका जताई जा रही है।
MHA ने मंजूर किए 1,248 प्रोजेक्ट, पूरे हुए सिर्फ 283
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत गृह मंत्रालय ने अब तक 1,248 प्रोजेक्ट्स को मंजूर किया है। पर्यटन को स्थानीय आय का नया जरिया बनाने के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के पहले चरण के तहत 145 करोड़ रुपये की लागत से 327 पर्यटन प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इनमें व्यूपॉइंट, एडवेंचर टूरिज्म, इको-टूरिज्म, इको-रिजॉर्ट, ट्रेक रूट और टूरिस्ट सेंटर शामिल हैं। कुल मंजूर परियोजनाओ में से सिर्फ 283 पूरा हो पाए हैं। ऐसे में यह साफ नहीं है कि इन 327 पर्यटन प्रोजेक्ट्स में से कितने असल में पूरे होकर गांवों तक पहुंचे हैं।
अरुणाचल प्रदेश। Photo Credit: MHA
कैंप, ट्रेनिंग से निकलकर जमीन पर क्या असर दिखेगा?
31 जुलाई 2026 तक सीमावर्ती इलाकों में 8,800 से अधिक विकास कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें जागरूकता अभियान, सरकारी सेवा शिविर, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा कैंप और कौशल सिखाने की ट्रेनिंग शामिल थी। अरुणाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,990 विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। लद्दाख में 2,221, उत्तराखंड में 2,038, हिमाचल प्रदेश में 1,037 और सिक्किम में 530 ऐसे आयोजन हुए। कैंप और प्रशिक्षण की रफ्तार तेज रही है, लेकिन सड़क, पुल और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की रफ्तार उसके मुकाबले धीमी नजर आ रही है।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। Photo Credit: MHA
वाइब्रेंट विलेज का दूसरा स्टेज शुरू, चुनौतियां क्या हैं?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 अप्रैल 2025 को वाइब्रेंट विलेज के दूसरे चरण को मंजूरी दी थी। 20 फरवरी 2026 को असम के कछार जिले के नाथनपुर गांव इसकी औपचारिक शुरुआत हुई थी। इस चरण का बजट 6,839 करोड़ रुपये है। यह वित्त वर्ष 2028-29 तक चलेगा।
15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 334 ब्लॉकों में 1,954 गांवों को चुना गया है। वाइब्रेंट विलेज के मुकाबले दूसरे चरण का दायरा लगभग 3 गुना बड़ा है। ऐसे में पहले चरण में मंजूरी और पूरा होने के बीच जो अंतर दिखा है, वह अगले चरणों में भी नजर आ सकता है।