20 जुलाई को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों को गंभीर चोटें आईं थी। घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। परिवारों ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर लगातार हमले हुए। उन्होंने अधिकारियों से घायल पुलिसवालों को न्याय दिलाने की मांग की।
पुलिसकर्मियों का परिवार कह रहा है कि घावों का इलाज अभी भी चल रहा है, लेकिन उनकी पीड़ा को नजरअंदाज कर दिया गया है। जबकि पुलिस पर छात्रों पर अत्याचार का आरोप लगाया जा रहा है।
झड़प में घायल ASI की पत्नी सीमा ने कहा, 'जिन उपद्रवियों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में बाधा डालने, उसकी छवि खराब करने और संसद की गरिमा को कम करने की कोशिश की, उन्हें उनके कामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और बख्शा नहीं जाना चाहिए।'
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'यूनिफॉर्म में खून लगा था, 4 घंटे तक बेहोश रहे पिता'
एक सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने बताया कि उनके पिता को जंतर मंतर पर मंच के पास हिंसक भीड़ ने घसीटा और भीड़ ने पीट-पीटकर मार डालने की कोशिश की। 25 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे उन्हें आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे चार घंटे तक बेहोश रहे। उनके यूनिफॉर्म में खून लगा था। सिर पर चार टांके लगे। परिवार के लिए वो रात बेहद मुश्किल थी।
संसद में चर्चा चाहते हैं पुलिसकर्मी के परिजन
कॉकरोच जनता पार्टी
(CJP) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के चार जवानों के परिजन ने शुक्रवार को कहा कि संसद में उनकी पीड़ा पर भी चर्चा होनी चाहिए। अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर हुई चर्चा मुख्य रूप से पुलिस प्रताड़ना के आरोपों पर ही केंद्रित रही है।
क्या है पुलिसकर्मियों के परिवार का दर्द?
'कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया' में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) की पत्नी, एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) की पत्नी ने उस दिन की कहानी बताई, जिस दिन टकराव हुआ था। अल्पतालों में खराब हालत में उन्हें भर्ती कराया गया था।
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अपने पति के घायल होकर घर लौटने की घटना को याद करते हुए एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने कहा, 'प्रदर्शनकारियों से शांति बरतने की अपील मेरे पति ने की थी। उन्होंने बोतल और पत्थर फेंके। पुलिस ने भीड़ से बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की थी। यह मेरे और मेरे 2 साल की बच्ची के लिए दर्दनाक लम्हा था।'
'हर वर्दी के पीछे पूरा परिवार'
उपनीत कौर ने कहा, 'हर वर्दी के पीछे केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि उसकी पत्नी, बच्चे, माता-पिता और पूरा परिवार होता है। हम चाहते हैं कि लोग इस बात को समझें।'
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से क्या हुआ?
कॉकरोच जनता पार्टी का 36 दिन तक आंदोलन चला। सरकार ने उनकी मुख्य मांगें मान ली थीं, जिनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, FIR वापस लेना और छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का आश्वासन शामिल था। पुलिसकर्मियों के परिवारों का कहना है कि छात्रों के दर्द को देखा जा रहा है लेकिन उन्हें अनदेखा किया जा रहा है। सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और सख्त किया है।