भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन मुद्दे पर टू स्टेट समाधान का समर्थन किया। वहीं 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयुक्त बयान का हिस्सा बना, जिसमें वेस्ट बैंक में इजरायल की गैर-कानूनी बस्तियां बसाने के प्रयास की निंदा की। हालांकि भारत 80 देशों और संगठनों वाले पहले बयान में शामिल नहीं हुआ। मगर एक नए बयान का भारत समेत 20 अन्य देशों ने समर्थन किया।
शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि भारत शुरुआती बयान का हिस्सा क्यों नहीं बना तो जवाब में जायसवाल ने बताया कि देशों और संगठनों ने डॉक्यूमेंट पर बातचीत नहीं की थी, जैसा कि आम बात है।
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रणधीर जायसवाल ने आगे कह कि भारत द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त राष्ट्र का संयुक्त बयान इजरायल के वेस्ट बैंक विस्तार की निंदा करने वाला कोई समझौता दस्तावेज नहीं था। विस्तार के मामले पर नई दिल्ली का रुख भारत-अरब लीग की मंत्रिस्तरीय बैठक में पहले ही व्यक्त किया जा चुका है। जायसवाल ने कहा कि जॉइंट स्टेटमेंट में बताई गई स्थिति के हिसाब से भारत ने खुद को फिलिस्तीनी पहल से जोड़ा।
31 जनवरी को नई दिल्ली में भारत और अरब लीग की मंत्रिस्तरीय बैठक हुई थी। साझा बयान में दोनों पक्षों ने 1967 की सीमाओं पर आधारित एक संप्रभु, स्वतंत्र और काम करने लायक फिलिस्तीन देश की मांग उठाई, जो इजरायल के साथ ही अस्तित्व में रहे। दोनों ही पक्षों ने फ़लिस्तीनी लोगों के जरूरी अधिकारों के इस्तेमाल का भी समर्थन किया।
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साझा बयान में सभी 100 देशों ने फिलिस्तीनी इलाके पर इजरायल के कब्जे को गैर-कानूनी बताया और वेस्ट बैंक में सभी बस्तियों को खाली करने की मांग की गई। सभी देशों और संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की जुलाई 2024 की एडवाइजरी के हिसाब से ठोस कदम उठाने का अपना वादा भी दोहराया।