अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अलग-अलग देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैर कानूनी करार दे दिया है। कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए अमेरिका के व्यापारिक भागीदारों पर इस तरह का टैरिफ लगाना सही नहीं था।
कोर्ट का कहना है कि ट्रंप ने उन्होंने कई देशों पर बड़े पैमाने पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाकर कानून का उल्लंघन किया है। यह ट्रंप की सख्त व्यापार नीतियों के लिए बड़ी कानूनी हार है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि ये टैरिफ कानूनी रूप से सही नहीं हैं। रॉबर्ट्स ने लिखा, 'राष्ट्रपति ने खुद से असीमित रकम, असीमित समय और असीमित दायरे वाले टैरिफ लगाने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग किया।' उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कोई ऐसे किसी कानून का जिक्र नहीं किया जिसमें कांग्रेस ने पहले कहा हो कि IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट) का कोई क्लॉज़ टैरिफ लगाने की अनुमति देता हो।
यह मामला 2025 में 'Learning Resources v. Trump' और 'Trump v. V.O.S. Selections, Inc. ने दायर किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की जांच की कि क्या IEEPA कानून ट्रंप प्रशासन को एक्जीक्यूटिव ऑर्डर से इस तरह के टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
क्या है IEEPA?
IEEPA एक अमेरिकी संघीय कानून है, जो 1977 में बना था। यह राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने पर विदेशी संस्थाओं के साथ आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की व्यापक शक्ति देता है। जैसे लेन-देन रोकना, संपत्ति फ्रीज कर देना, व्यापार सीमित करने जैसी असाधारण शक्तियां देता है खासकर जब कोई असाधारण खतरा हो।
ट्रंप ने पिछले साल जनवरी में पद संभालने के बाद IEEPA का इस्तेमाल किया। उन्होंने अमेरिकी व्यापार घाटे, अवैध अप्रवासन और ड्रग तस्करी से जुड़े राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किए। इसके जरिए उन्होंने भारत समेत कई व्यापारिक देशों पर टैरिफ लगाए, ताकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 'फिर से बेहतर' किया जा सके।
एक्जीक्यूटिव ऑर्डर से लगाया टैरिफ
'Liberation Day' के दिन 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 14257 पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश के तहत ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगाए। प्रशासन ने कहा कि ये कदम अमेरिकी नौकरियां बचाने और व्यापार समस्याओं को ठीक करने के लिए जरूरी हैं। इन टैरिफ से वैश्विक बाजार हिल गए, अमेरिका के पुराने व्यापारिक साथी नाराज हुए और दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी।
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ट्रंप के इन टैरिफ की डेमोक्रेट्स ने कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि संविधान के अनुसार टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। कई निचली अदालतों ने भी कहा कि ये टैरिफ राष्ट्रपति की शक्ति से बाहर हैं।
फैसले से कुछ दिन पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ट्रंप को झटका लगा था, जब तीन रिपब्लिकन सदस्यों ने पार्टी लाइन तोड़कर डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर ट्रंप के टैरिफ को कांग्रेस की चुनौतियों से बचाने के प्रयास को रोका।