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FCRA Bill 2026 पर क्यों मचा घमासान? विदेशी फंडिंग के नए नियमों से भड़का विपक्ष

केंद्र के FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर सियासी घमासान तेज है। विपक्ष संसद में बिल का विरोध करेगा।

What is FCRA Bill 2026

लोकसभा, Photo Credit: ANI

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केंद्र सरकार के विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Bill 2026) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। विपक्ष ने संसद में इस बिल का विरोध करने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि सरकार इसे इसी सप्ताह संसद में पेश कर सकती है। हालांकि, अगले सप्ताह के संभावित सरकारी कामकाज में फिलहाल इस विधेयक का नाम शामिल नहीं है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष बिल का विरोध करेगा। उन्होंने बताया कि सोमवार को सभी दलों के फ्लोर नेताओं की बैठक के बाद इस पर फैसला किया जाएगा। वहीं NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बिल के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार बिल वापस नहीं लेती है तो इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाना चाहिए।

 

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कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप

बिल को लेकर संसद में टकराव की संभावना के बीच कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। सांसदों से 10,11 और 12 अगस्त को सदन में मौजूद रहने को कहा गया है। पार्टी ने INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों से भी अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की अपील की है।

विदेशी फंड और संपत्तियों पर क्या बदलेगा?

FCRA कानून विदेशों से मिलने वाले चंदे और आर्थिक मदद को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित संशोधन में नामित प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है। अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है तो विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियां इस प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं। अगर संस्था तय समय में दोबारा रजिस्ट्रेशन हासिल नहीं कर पाती है तो संपत्तियों को स्थायी रूप से ट्रांसफर भी किया जा सकता है। 15 जुलाई 2026 तक देश में 14,449 FCRA रजिस्ट्रेशन सक्रिय, जबकि 22,498 रद्द और 15,212 की अवधि समाप्त हो चुकी थी।

 

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FCRA Bill 2026 पर क्यों मचा घमासान?

विधेयक की धारा 14B, 16A और 16B को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। धारा 14B में यह बताया गया है कि किसी संस्था का FCRA सर्टिफिकेट कब खत्म माना जाएगा। वहीं, धारा 16A के तहत अगर किसी संस्था का सर्टिफिकेट खत्म हो जाता है, तो उसके पास मौजूद विदेशी फंड और संपत्तियां डेजिग्नेटेड अथॉरिटी के नियंत्रण में जा सकती हैं। इसके अलावा, धारा 16B को लेकर आशंका है कि इसके नए नियम पुराने मामलों पर भी लागू किए जा सकते हैं।

 

विपक्ष का आरोप है कि इससे NGOs और सामाजिक संगठनों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इसे असंवैधानिक बताया है। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी बिल को कठोर बताते हुए चिंता जताई है। मिजोरम और केरल में भी इसके प्रावधानों का विरोध सामने आया है। DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सरकार से बिल वापस लेने की मांग की है।


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