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अन्ना आंदोलन से NEET विवाद तक, कैसे 3 दशक तक जनाक्रोश का गवाह रहा जंतर मंतर?

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। यह जगह अन्ना के अनशन से NEET आंदोलन तक कई आंदोलनों का केंद्र रही।

Jantar Mantar जंतर मंतर

जंतर मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के स्थल से डिनोटिफाई कर दिया गया है। Photo Credit: PTI

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दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया है। कनॉट प्लेस के पास स्थित यह जगह दशकों से धरना-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रही है। यहां लोग इस उम्मीद से आते थे कि उनकी आवाज सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंचेगी।

अन्ना हजारे के अनशन से लेकर NEET पेपर लीक के खिलाफ हालिया आंदोलन तक, जंतर मंतर कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है। भ्रष्टाचार, जवाबदेही, महिला सुरक्षा और सामाजिक बदलाव की मांग को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग यहां जुटे। PTI-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक अब यहां विरोध प्रदर्शन नहीं किए जा सकेंगे।

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जंतर मंतर कैसे बना प्रदर्शन स्थल?

रिपोर्ट के मुताबिक यहां धरना-प्रदर्शन 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुए। इससे पहले प्रदर्शन संसद के पास बोट क्लब के निकट होते थे। साल 1993 में सरकार की आर्थिक नीतियों और कथित सांप्रदायिकता के खिलाफ 'जेल भरो' आंदोलन के लिए यहां 33 संगठन जमा हुए। संसद में एक सांसद ने कहा था कि उस प्रदर्शन में करीब 25,000 लोग शामिल हुए थे।

अन्ना आंदोलन से निर्भया आंदोलन का रहा गवाह

5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर यहां 5 दिन की भूख हड़ताल शुरू की। आंदोलन ने तब जोर पकड़ा, जब सरकार मंत्रियों और नागरिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की संयुक्त मसौदा समिति बनाने पर राजी हुई। हजारे ने 9 अप्रैल 2011 को अनशन खत्म किया।

दिसंबर 2012 में दिल्ली में चलती बस में महिला से सामूहिक दुष्कर्म हुआ। पीड़िता को निर्भया नाम दिया गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद जंतर मंतर और आसपास का इलाका प्रदर्शनों का अहम स्थान बना। हजारों लोग, खासकर युवा, न्याय और महिला सुरक्षा के लिए सख्त कानून की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे।

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Ram Leela Maidan
राम लीला मैदान। Photo Credit: PTI

किसान, पहलवान और छात्रों के प्रदर्शन का भी केंद्र

साल 2014 में अरुणाचल प्रदेश के छात्र निदो तानिया की मौत के बाद प्रदर्शन हुए। उन पर दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में कथित तौर पर हमला हुआ था। इस घटना से नस्ली भेदभाव और पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हिंसा को लेकर आक्रोश उभरा।

साल 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कृषि संकट को उठाने के लिए 41 दिन तक प्रदर्शन किया। उन्होंने बढ़ते कर्ज और सूखे से हुए नुकसान से राहत मांगी। साल 2023 में ओलंपिक पदक विजेताओं समेत प्रमुख पहलवानों ने कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यहां धरना दिया। उन्होंने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग की।

साल 2024 में छात्र और अन्य लोग NEET-UG पेपर लीक विवाद पर जमा हुए। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जवाबदेही की मांग की। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में NEET-UG पेपर लीक के एक और विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यहां प्रदर्शन हुआ। आखिर में प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया।

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क्या कह रहे हैं लोग?

दिल्ली के रहने वाले डॉ.प्रणव राज सिंह ने PTI-भाषा से कहा कि निर्भया मामले के समय वे किशोर थे। उन्होंने कहा कि राजधानी में ऐसी घटना जानकर वे व्यथित थे। प्रदर्शन शुरू हुए तो उन्हें लगा कि उन्हें इसका हिस्सा बनना है। इसलिए वे अपने दोस्तों के साथ जंतर मंतर गए।

अन्ना हजारे आंदोलन में शामिल रहीं रानी शर्मा ने कहा कि जंतर मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाना असहमति की जगह को सीमित करने जैसा है। उनके मुताबिक सत्ता के केंद्र के पास होने की वजह से यह नागरिकों के लिए अपनी बात रखने और सरकार को जवाबदेह ठहराने की आदर्श जगह थी।

 

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