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स्टूडेंट्स खोजेंगे समस्याओं का समाधान, सरकार देगी मदद, क्या है SFIC?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को बेंगलुरु स्थित IISc में सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज का शुभारंभ किया। यह पहल युवाओं को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और फिर उनके ऐसे समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित करेगी।

Seva First Innovation Challenge 2026

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी-IISc) में सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज का शुभारंभ किया। यह पहल युवाओं को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और फिर उनके ऐसे समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित करेगी, जिन्हें आजमाया जा सके और जरूरत के हिसाब से बेहतर बनाया जा सके। इसके बाद इसे फिर जमीन पर लागू किया जा सके।  

 

यह चैलेंज बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में शुरू हुआ। इसमें पांच राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे, इनमें कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं। 

 

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कौन ले सकता है इसमें भाग? 

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह चैलेंज स्कूलों, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), पॉलिटेक्निक, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के युवा प्रतिभागियों को एक साथ लाएगा। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्र, ITI और पॉलिटेक्निक के स्टूडेंट्स, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र हिस्सा ले सकेंगे। इसमें भागीदारी के तीन लेवल पर होगी, जूनियर, टेक्निकल और ओपन।  

 

स्कूल के छात्र अपने आसपास की समस्याओं और उनके आसान समाधान पर काम करेंगे। इसके अलावा, ITI और पॉलिटेक्निक के छात्र इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन और दूसरी तकनीकी समस्याओं के समाधान तैयार करेंगे। वहीं कॉलेज, यूनिवर्सिटी और रिसर्च स्कॉलर ऐसे प्रोटोटाइप या मॉडल तैयार करेंगे, जिन्हें आगे जमीन पर लागू किया जा सके। 

पांच नेशनल थीम पर फोकस करेगा यह चैलेंज

  • क्लीन और सस्टेनेबल भारत
  • समृद्ध किसान-समृद्ध भारत
  • स्वस्थ और समावेशी भारत
  • एजुकेटेड और स्किल्ड भारत
  • सिक्योर भारत  

आज यानी 25 सितंबर से इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे और 24 अक्टूबर 2026 तक चलेंगे। इसके अलावा,  प्रतियोगिता का राष्ट्रीय फिनाले 10 से 17 दिसंबर तक नई दिल्ली में होगा। इसमें चुने गए प्रतिभागियों को विशेषज्ञों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मदद, लैब और टेस्टिंग सुविधाएं, प्रोटोटाइप बनाने की सुविधा, इनक्यूबेशन सपोर्ट और शुरुआती फंडिंग मिल सकती है।

आइडिया को बड़े स्तर पर लागू करने का मौका

साथ ही दिए गए आइडिया का टेस्ट करने और पेटेंट या बौद्धिक संपदा से जुड़ी मदद भी दी जाएगी। अच्छे समाधानों को आगे सरकारी विभागों, सरकारी कंपनियों (PSU) और निजी कंपनियों से जोड़कर उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने का मौका भी मिल सकता है।

 

इसके लिए प्रतिभागियों को एकेडमिक और इंडस्ट्री मेंटरशिप, लैब्स, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़, टेस्टिंग सपोर्ट, इनक्यूबेशन, सीड और पायलट फंडिंग, फील्ड-टेस्टिंग के मौके और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन पर गाइडेंस मिलेगी। अच्छे सॉल्यूशन को अपनाने के लिए मंत्रालय, राज्य सरकारों, शहरी और ग्रामीण लोकल बॉडीज, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और इंडस्ट्री से भी जोड़ा जा सकता है।

 

इस पहल को शिक्षा मंत्रालय, AICTE और UGC मिलकर आयोजित कर रहे हैं, जबकि IISc बेंगलुरु इसका नोडल संस्थान होगा। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं के आइडिया को सिर्फ आइडिया तक सीमित न रखकर उन्हें टेस्ट करने, लागू करने और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने तक ले जाना है।


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