logo

मूड

ट्रेंडिंग:

NHRC के 33 साल, शिकायतें 26 फीसदी घटीं, किस तरह के मामले सबसे ज्यादा आए?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) आज अपना 33वां स्थापना दिवस मना रहा है। इन 33 सालों में आयोग ने कुल 24,33,716 मामलों पर कार्रवाई की है। आयोग ने किस तरह के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए? पढ़ें रिपोर्ट

NHRC 33 Years,  मानवाधिकार उल्लंघन

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) आज अपना 33वां स्थापना दिवस मना रहा है, आज ही के दिन 12 अक्टूबर, 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई थी। इन 33 सालों में आयोग ने कुल 24,33,716 मामलों पर कार्रवाई की है। इनमें स्वतः संज्ञान यानी सुओ मोटो लेकर दर्ज किए गए 3,100 मामले शामिल हैं। आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में शिकायतों की संख्या में करीब 26 फीसदी की कमी आई है।  

 

1 अक्टूबर, 2025 से 30 सितंबर, 2026 तक 54,673 शिकायतें और सुओ मोटो लेकर 119 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान आयोग ने 80 मामलों में मौके पर पहुंचकर जांच की और 53,733 मामलों का निपटारा किया। इसके अलावा, 157 मामलों में मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को 9.7 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता देने की सिफारिश की गई।  

 

यह भी पढ़ें: नशे के खिलाफ कानूनी शिकंजा होगा मजबूत, कांगड़ा-मंडी में खुलेंगी NDPS अदालतें

एक साल में 26 फीसदी घटीं शिकायतें

NHRC के 2025 के आंकड़ों को देखें तो 1 अक्टूबर 2024 से 30 सितंबर 2025 के बीच आयोग के पास 73,849 शिकायतें आई थीं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच यह घटकर 54,673 रह गई। यानी एक साल में शिकायतों की संख्या 19,176 कम हुई, जो करीब 26 फीसदी की गिरावट है। 

NHRC की 19 मई 2026 की आधिकारिक प्रेस रिलीज में आयोग के ऑनलाइन सिस्टम के जरिए पिछले 5 साल में मिली 4.28 लाख शिकायतों का ब्योरा दिया गया है। आयोग के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस से जुड़े उल्लंघन और माफिया के जरिए शोषण से जुड़ी थीं। 

सबसे ज्यादा किस तरह की शिकायतें आती हैं? 

हाल ही में NHRC के सेक्रेटरी जनरल भरत लाल ने कमीशन के ऑनलाइन सिस्टम के जरिए मिली शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 5 सालों में 4.28 लाख शिकायतें मिली हैं, जिनमें से मुख्य शिकायतें अलग-अलग कैटेगरी में आती हैं। इस आधार पर देखा जाए तो पुलिस से जुड़े उल्लंघन 18 फीसदी, माफियाओं द्वारा संगठित शोषण 17.4 फीसदी, सर्विस से जुड़े मामले यानी पेंशन/सैलरी का भुगतान न होना 6 फीसदी और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन 5.8 फीसदी है। 

 

 

इसके अलावा, जेलों और कारागारों में हालात 3.5% फीसदी, मजदूरों के अधिकारों का उल्लंघन 2.2% फीसदी, स्वास्थ्य से जुड़े उल्लंघन 2 फीसदी, शिक्षण संस्थानों में मानवाधिकारों का उल्लंघन 2 फीसदी, बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन 1.7 फीसदी रहा। बता दें कि ये प्रतिशत आयोग के ऑनलाइन सिस्टम के जरिए पिछले पांच साल में मिली 4.28 लाख शिकायतों के वर्गीकरण पर आधारित हैं। हालांकि, इन आंकड़ो से ये साफ हो जाता है कि किस तरह की शिकायतें आयोग में ज्यादा आती हैं। 

33 साल में 274 करोड़ रुपये की राहत की सिफारिश

आयोग ने अपने 33 साल के सफर में कुल 9,085 मामलों में मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को 274 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक राहत देने की सिफारिश की है। पिछले एक साल यानी 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच 157 मामलों में 9.7 करोड़ रुपये से ज्यादा की राहत देने की सिफारिश की गई। इस दौरान आयोग ने 80 मामलों में मौके पर जाकर जांच की और 53,733 मामलों का निपटारा किया।


और पढ़ें