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भारत की तोपों, हथियारों और मिसाइलों की बढ़ती मांग के पीछे क्या है वजह?

वैश्विक रक्षा बाजार में मेड-इन-इंडिया हथियारों पर भरोसे तेजी से बढ़ता जा रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीदने का फैसला किया है।

Why India guns weapons and missiles demand in global

77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और ब्रह्मोस मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर, Photo Credit: ANI

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भारत का रक्षा निर्यात लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का फैसला किया है। इस सौदे ने दुनिया को यह भरोसा दिलाया है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब तेजी से मजबूत और भरोसेमंद बन रही है। पिछले कुछ सालों में भारत की पहचान सिर्फ हथियार खरीदने वाले देश की नहीं रही, बल्कि अब भारत दुनिया के कई देशों के लिए एक भरोसेमंद हथियार और रक्षा उपकरण सप्लाई करने वाला देश बनकर उभरा है।

 

पूर्वी एशिया से लेकर यूरोप और दक्षिण अमेरिका तक भारत में बने हथियारों और मिसाइलों की मांग तेजी से बढ़ी है। रक्षा मंत्रालय की कोशिशों और देश में रक्षा उत्पादन बढ़ने की वजह से भारत का रक्षा निर्यात अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

 

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किन-किन सैन्य साजो-सामान को बेचता है भारत?

भारत अब दुनिया के कई देशों को कई तरह के आधुनिक रक्षा उपकरण बेच रहा है। भारत के रक्षा निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी स्वदेश में बनी मिसाइलों की है। इनमें दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस और हवा से हवा में मार करने वाली आधुनिक अस्त्र (Astra) मिसाइल शामिल हैं, जो दुश्मन को दूर से ही निशाना बना सकती हैं।

इसके अलावा, जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश (Akash) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की भी दुनिया के कई देशों में अच्छी मांग है। मिसाइलों के अलावा भारत एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), तेजस हल्का लड़ाकू विमान, ATAGS जैसी आधुनिक तोपें, बख्तरबंद गाड़ियां, डिजिटल रडार सिस्टम और अत्याधुनिक गोला-बारूद भी दूसरे देशों को निर्यात कर रहा है।

कौन-कौन से देश हैं भारतीय हथियारों के खरीदार?

भारतीय हथियारों की मांग अब दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है। दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस सबसे पहले भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला देश बना। इसके बाद वियतनाम और अब इंडोनेशिया ने भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का समझौता किया है।

 

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वहीं, आर्मेनिया ने भारत का आकाश एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है। इंडोनेशिया भारत की अस्त्र मिसाइल खरीदने वाला पहला विदेशी देश बन गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी भारत से बड़ी संख्या में आर्टिलरी शेल खरीद चुका है और अब उसकी नजर ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम पर भी है। इसके अलावा थाईलैंड, मोरक्को, मॉरीशस, म्यांमार और श्रीलंका जैसे कई देश भी भारत से अलग-अलग तरह के रक्षा उपकरण खरीद चुके हैं।

क्यों बढ़ रही है भारतीय हथियारों की मांग?

भारतीय हथियारों की बढ़ती मांग के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं उनकी भरोसेमंद गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और कम लागत। अमेरिका, यूरोप या रूस के महंगे रक्षा सिस्टम के मुकाबले भारत के स्वदेशी हथियार, जैसे ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम, न सिर्फ नई तकनीक से लैस हैं बल्कि कीमत के हिसाब से भी काफी किफायती हैं।

 

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दूसरी बड़ी वजह यह है कि भारत की वैश्विक छवि एक भरोसेमंद और निष्पक्ष साझेदार की है। भारत हथियारों की आपूर्ति किसी राजनीतिक शर्त के साथ नहीं जोड़ता, जिससे दूसरे देशों का उस पर भरोसा बढ़ा है।

 

इसके अलावा, दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच कई देश कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। ऐसे में वे भारतीय हथियारों को एक सुरक्षित, भरोसेमंद और रणनीतिक तौर पर बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

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