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जब अली खामेनेई ने की थी नेहरू की तारीफ, 13 साल पुराना बयान अब चर्चा में

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत से दुनियाभर के शिया समुदाय में दुख की लहर है। भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक संबंध हैं। उनकी मौत से देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन की खबर है।

Jawaharlal Nehru and Ali Khamenei

जवाहर लाल नेहरू और अली खामेनेई। (Photo Credit: Social Media)

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इजरायल की एयर स्ट्राइक में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का निधन हो गया है। ईरान की सरकारी मीडिया ने खुद ही इसकी पुष्टि की है। अमेरिका और इजरायल ने अली खामेनेई को उस वक्त निशाना बनाया, जब वह अपने कार्यालय पर मौजूद थे। एयर स्ट्राइक में  खामेनेई की बेटी, दामाद, पोते और बहू को भी मारा गया है। ईरान ने अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। बता दें कि 1989 में इस्लामिक ईरान के संस्थापक इमाम रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद अयातुल्ला खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता बनाया गया था।

 

अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कारगिल, श्रीनगर, लखनऊ और कर्नाटक में शिया समुदाय ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध किया। भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक संबंध हैं। लोगों के बीच भी रिश्ते हैं। यही कारण है कि अली खामेनेई का प्रभाव भी यहां खूब रहा है। 

 

 

 

 

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भारत के संबंध में वह अक्सर अपने विचार साझा करते थे। एक बार उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तारीफ की। उनकी पुस्तक 'ग्लिम्प्सेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' का जिक्र किया और बताया कि मुझे यह किताब पढ़ने से पहले यह नहीं पता था कि भारत में इतनी समृद्धि थी। भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को समझने में जवाहर लाल नेहरू की किताब ने अली खामेनेई की काफी मदद की थी। यही कारण है कि वह उनकी किताब की तारीफ करने से खुद को भी नहीं रोक पाए थे।

 

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6 जून 2013 को अली खामेनेई ने एक्स पर पोस्ट किया था, 'नेहरू की 'ग्लिम्प्सेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' पढ़ने से पहले मुझे नहीं पता था कि उपनिवेशीकरण से पहले भारत ने इतनी महत्वपूर्ण प्रगति की थी।' बता दें कि पंडित जवाहर लाल नेहरू की यह किताब बेटी इंदिरा गांधी को लिखे पत्रों के संग्रह पर आधारित है। इसमें प्राचीन काल से आधुनिक काल तक की सभ्यताओं का इतिहास है।


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